दुनिया की दो सबसे ताकतवर सत्ता, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। महीनों से चले आ रहे टैरिफ विवाद और तनाव के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों से उम्मीद जगी है कि जल्द ही दोनों देश एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से भारत को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘करीबी दोस्त’ और एक ‘मजबूत वैश्विक नेता’ बताया।
ट्रंप ने भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक “अच्छी और संतुलित ट्रेड डील” निश्चित रूप से होगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीद और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर भारतीय उत्पादों पर शुल्क (टैरिफ) बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर था। हालांकि, इस उच्च टैरिफ के बावजूद, दिसंबर में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 6.89 अरब डॉलर पर स्थिर बना रहा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर से अधिक करना है। डील में मुख्य गतिरोध अमेरिका की उस मांग को लेकर है, जिसमें वह भारत से डेयरी और कृषि बाजार खोलने की मांग कर रहा है। भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि वह अपने किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों से कोई समझौता करने को तैयार नहीं है।
इन अड़चनों के बावजूद, हालिया राजनयिक चर्चाओं में तेजी आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई है। इसके अलावा, भारत में नियुक्त नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने भी ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के उस विवादास्पद बयान को भारत ने पहले ही खारिज कर दिया था, जिसमें डील अटकने का कारण पीएम मोदी द्वारा फोन न करना बताया गया था, यह स्पष्ट करते हुए कि बातचीत लगातार जारी है।
दावोस में राष्ट्रपति ट्रंप की यह नरमी दर्शाती है कि अमेरिका अब भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को स्वीकार कर रहा है। आने वाले हफ्तों में इस व्यापार समझौते के होने की प्रबल संभावना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक मंच पर भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत होगी।









