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यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर SC की रोक: ‘बंटवारे’ पर संतुलन की बात, अखिलेश-मायावती ने बताया सही कदम

यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर SC की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाकर देश भर में चल रही एक गंभीर बहस को फिलहाल थाम दिया है। इस फैसले के तुरंत बाद राजनीति, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नामों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। इस मामले में कवि और सामाजिक चिंतक कुमार विश्वास ने देश में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं प्रमुख विपक्षी नेताओं ने कोर्ट के निर्णय को सामाजिक न्याय की दिशा में एक सही कदम बताया है।

कवि और सामाजिक चिंतक कुमार विश्वास ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज भारत किसी भी तरह के बंटवारे या टकराव को झेलने की स्थिति में नहीं है। कुमार विश्वास ने कहा, “सरकार और राजनीतिक दलों को ऐसी कोई भी रेखा नहीं खींचनी चाहिए, जिससे समाज में डर, तनाव या विभाजन पैदा हो।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के साथ सदियों तक अत्याचार हुआ है और उन गलतियों को सुधारना बेहद जरूरी है, लेकिन सुधार के नाम पर किसी भी निर्दोष व्यक्ति को असहज महसूस न हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘सही कदम’ बताया। उन्होंने कहा कि अदालत का काम यह सुनिश्चित करना है कि किसी के साथ नाइंसाफी न हो, और इस निर्णय में वही भावना दिखाई देती है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी कानून में सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि उसका इरादा (Intention) भी साफ होना चाहिए।

मायावती ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों की वजह से विश्वविद्यालयों में सामाजिक तनाव का माहौल बन गया था, ऐसे में कोर्ट द्वारा इन नियमों पर रोक लगाना बिल्कुल उचित फैसला है। मायावती ने यह भी कहा कि यूजीसी को नियम लागू करने से पहले सभी वर्गों और पक्षों को भरोसे में लेना चाहिए था।

पंकज सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही बताया और कहा कि यह मुद्दा बहुत संवेदनशील था। अदालत ने लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यूजीसी के नियमों पर रोक लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में शांति बनाए रखने और अनावश्यक सामाजिक तनाव को रोकने की दिशा में एक अहम कदम है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और यूजीसी आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या ऐसा रास्ता निकाला जाता है, जिससे सामाजिक समानता भी बनी रहे और किसी भी वर्ग के मन में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

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