उत्तर प्रदेश के सीतापुर में विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासन ने शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार, 22 अगस्त की सुबह SDM, EO, तहसीलदार, कोतवाल और कई चौकी प्रभारियों की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यालय को सील कर दिया गया। प्रशासन ने नजूल भूमि पर बने इस कार्यालय को अपने कब्जे में ले लिया है।
बताया जा रहा है कि शहर कांग्रेस कमेटी का कार्यालय नजूल भूमि पर स्थित घंटाघर की इमारत में संचालित हो रहा था। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए पांच चौकियों की पुलिस मौके पर तैनात रही।
नजूल भूमि पर संचालित हो रहा था कार्यालय
प्रशासन के अनुसार, कांग्रेस का यह कार्यालय नजूल भूमि पर बना हुआ था। इसी जमीन को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने कार्रवाई की है। प्रशासन का कहना है कि लंबे समय से संपत्ति का किराया भी जमा नहीं किया गया था।
बताया गया है कि वर्ष 1971 के बाद से करीब 55 वर्षों तक किराया जमा नहीं किया गया। इसी आधार पर नगर पालिका की ओर से कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया था।
4 जुलाई को नगर पालिका ने दिया था नोटिस
नगर पालिका प्रशासन ने 4 जुलाई 2026 को शहर कांग्रेस कमेटी को नोटिस जारी किया था। इसके बाद कांग्रेस कमेटी ने कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
कांग्रेस की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर कर बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
15 दिन का समय खत्म होने के बाद सील
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नगर पालिका ने कांग्रेस कार्यालय खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बाद शनिवार को प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कार्यालय को सील कर दिया।
इसके साथ ही प्रशासन ने कार्यालय का कब्जा भी अपने नियंत्रण में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान कई अधिकारी मौजूद
कांग्रेस कार्यालय को सील करने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इनमें SDM सदर डॉ. जनार्दन, अधिशासी अधिकारी विकास कुमार, तहसीलदार अजीत जायसवाल और शहर कोतवाल दिनेश प्रकाश पाण्डेय शामिल रहे।
पुलिस की मौजूदगी में कार्यालय को सील करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी
प्रशासन की कार्रवाई के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कार्यालय सील किए जाने का विरोध किया और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश और नगर पालिका की ओर से जारी बेदखली नोटिस के बाद की गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले कार्रवाई पर सियासी नजर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक चर्चा को भी तेज कर दिया है। हालांकि प्रशासन ने इसे पूरी तरह नजूल भूमि, किराया और बेदखली से जुड़े प्रशासनिक मामले के तौर पर बताया है।
अब कांग्रेस इस कार्रवाई के खिलाफ आगे क्या कदम उठाती है और क्या यह मामला चुनावी माहौल में राजनीतिक मुद्दा बनता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।