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ईरान पर अमरीका का ‘इकोनॉमिक अटैक’: क्या मोजतबा खामेनेई की जवाबी कार्रवाई से भड़केगी जंग?

अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों में तेल, शिपिंग, टेक्नोलॉजी और वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कई क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है।
ईरान पर अमेरिका का 'इकोनॉमिक अटैक'

अमेरिका और ईरान के बीच जंग की आग फिलहाल शांत जरूर है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान की आर्थिक नाकेबंदी के ऐलान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अब अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने साफ कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच युद्ध भड़कने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस बढ़ते दबाव का जवाब कैसे देंगे?

ट्रंप ने ईरान की आर्थिक नाकेबंदी का किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को लेकर बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को सैन्य या किसी अन्य तरह की मदद देता है तो उसे भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को समझौते का बड़ा मौका दिया था, लेकिन तेहरान इसका फायदा उठाने में नाकाम रहा। इसके बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की। ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलगाव की रणनीति बताया।

ईरान ने नाकेबंदी को बताया ‘आर्थिक आतंकवाद’

अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप की नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि तथाकथित आर्थिक नाकेबंदी अमेरिका की अपनी आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

उन्होंने अमेरिका के बढ़ते कर्ज और ब्याज खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि असफल नीतियों को जारी रखने से अमेरिका को हार का सामना करना पड़ेगा और ईरानियों की दुश्मनी और बढ़ेगी। अराघची ने ट्रंप की आर्थिक नाकेबंदी को ‘आर्थिक आतंकवाद’ बताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई वैश्विक अर्थव्यवस्था और देशों की संप्रभुता के लिए खतरा है।

सीजफायर के बाद भी खत्म नहीं हुआ तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकलेगा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कई कोशिशें भी हुईं, लेकिन ये प्रयास किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सके।

इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ समय तक हमले और जवाबी कार्रवाई भी जारी रही। हालांकि पिछले कुछ समय से सैन्य कार्रवाई की तीव्रता कम हुई है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है। यही वजह है कि ट्रंप के आर्थिक दबाव के ऐलान के बाद पीट हेगसेथ के बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

पीट हेगसेथ ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं करता। उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले का विकल्प फिलहाल रोक दिया है? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करेगा।

हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी सेना के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करता है या अपनी सीमा पार करता है तो अमेरिका जरूरी कदम उठाने में पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना, रडार और मिसाइल क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचाया है।

हालांकि उन्होंने माना कि ईरान के पास अभी भी कुछ सैन्य क्षमता मौजूद है, लेकिन वह पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। अमेरिका का दावा है कि इसी वजह से वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तेल की आपूर्ति को जारी रखने में सक्षम है।

परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए दबाव

हेगसेथ के मुताबिक, लगातार आर्थिक दबाव ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर सकता है। अमेरिका का उद्देश्य आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए तेहरान को बातचीत के लिए तैयार करना बताया जा रहा है।

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर कई बड़े दावे कर चुके हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है। उन्होंने ईरान की सेना, नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की स्थिति को भी कमजोर बताया है।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अमेरिका आर्थिक दबाव को कितना आगे बढ़ाता है, बल्कि यह भी है कि ईरान इस दबाव का जवाब किस तरह देता है। अगर तेहरान की ओर से कोई बड़ा सैन्य या रणनीतिक कदम उठाया जाता है तो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा खुले संघर्ष में बदल सकता है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान का परमाणु कार्यक्रम आने वाले दिनों में इस टकराव के सबसे बड़े केंद्र बन सकते हैं।

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