वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के कथित अमेरिकी प्रयास के बाद वैश्विक भू-राजनीति में भारी तनाव पैदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों ने न केवल वेनेजुएला के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, बल्कि कोलंबिया, ईरान और यहां तक कि डेनमार्क के स्वशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड सहित कई अन्य देशों को भी कब्जे या हमले की खुलेआम चेतावनी जारी कर दी है। यह धमकी किन कारणों से दी गई है और इसके क्या निहितार्थ हैं, आइए जानते हैं।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने के दावे के बाद वाशिंगटन की ओर से राजनयिक और सैन्य दबाव की एक नई लहर शुरू हुई है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ये राष्ट्र वेनेजुएला के राजनीतिक संकट में भूमिका निभा रहे हैं या अमेरिकी हितों के खिलाफ खड़े हैं। यह आक्रामक रुख अमेरिका की ‘पहले अमेरिका’ नीति के तहत वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के प्रयास को दर्शाता है।
जिन देशों और क्षेत्रों को अमेरिका ने सीधे तौर पर खतरे की सूची में रखा है, उनकी भौगोलिक विविधता चौंकाने वाली है। इस सूची में लैटिन अमेरिका से कोलंबिया, क्यूबा, और मैक्सिको जैसे देश शामिल हैं, जिन्हें वेनेजुएला के प्रति सहानुभूति रखने या उसकी मदद करने वाला माना जाता है। मध्य पूर्व के प्रमुख देश ईरान को भी स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है।
सबसे अप्रत्याशित चेतावनी डेनमार्क के एक स्वशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड के लिए जारी की गई है। यह दर्शाता है कि अमेरिका का यह आक्रामक रुख केवल वेनेजुएला या उसके सहयोगियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक वैश्विक दायरे में अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को साधने का प्रयास है। इस चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।
वैश्विक पटल पर तनाव की यह स्थिति दर्शाती है कि आने वाले समय में इन देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में और जटिलता आ सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक शांति और स्थिरता पर पड़ेगा।









