अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी तेज है, लेकिन अब शब्दों से ज्यादा ताकत हथियारों की बोलती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चेतावनी भरे बयानों के बीच, अमेरिका ने अपनी सबसे बड़ी सैन्य ताकत, एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) को पूरे स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के बेहद करीब तैनात कर दिया है।
यह जंगी बेड़ा दुनिया के सबसे विध्वंसक युद्धपोतों में शामिल है। अमेरिकी तैनाती में केवल यूएसएस अब्राहम लिंकन ही नहीं, बल्कि गाइडेड मिसाइल क्रूजर, अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज, परमाणु सबमरीन और दर्जनों लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेड़ा अकेले ही किसी भी देश की सैन्य क्षमता को पस्त करने की ताकत रखता है।
USS अब्राहम लिंकन की सबसे बड़ी खासियत उसकी जल, थल और नभ तीनों मोर्चों पर एक साथ हमला करने की क्षमता है। इस युद्धपोत से उड़ान भरने वाले अमेरिकी फाइटर जेट्स और क्रूज मिसाइलें दुश्मन के सैन्य ठिकानों को मिनटों में तबाह कर सकते हैं। वहीं, ईरान की तरफ से भी सीधा और सख्त जवाब आया है। एक ईरानी कमांडर ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि “हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं।”
ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी स्टेल्थ तकनीक है। अमेरिका के पास स्टेल्थ बॉम्बर B-2, घातक ड्रोन MQ-9 Reaper, और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 जैसे सिस्टम हैं, जो ईरानी एयर डिफेंस के लिए लगभग अदृश्य हैं। इस बीच, अमेरिका द्वारा 52 नए स्टेल्थ बॉम्बर तैयार करने की दीर्घकालिक योजना को विशेषज्ञ संभावित युद्ध की तैयारी मान रहे हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुली चेतावनी दी है कि वे पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी बाहरी हमले का जवाब तुरंत दिया जाएगा।
इस बढ़ते तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ रहा है। इजरायल ने भी हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इजरायली सेना प्रमुख ने साफ कहा है कि देश किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी ओर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में फिर दोहराया था कि अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “मैं युद्ध नहीं चाहता, लेकिन हम हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग आखिरी विकल्प होगा।”
एक तरफ जहां कूटनीति के जरिए मामले को सुलझाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर युद्ध की पूरी तैयारी दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या दुनिया एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ रही है।









