वाराणसी में कोडिनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के करोड़ों रुपये के रैकेट पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। फर्जी फर्मों के जरिए यह अवैध कारोबार चलाने वाले दो मुख्य आरोपितों—भोला जायसवाल और विनोद अग्रवाल—को गिरफ्तार कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
वाराणसी पुलिस ने सारनाथ और रोहनिया थाने में दर्ज मुकदमों के तहत विनोद अग्रवाल और भोला जायसवाल को फास्ट ट्रैक कोर्ट (14वां वित्त आयोग) के समक्ष पेश किया। इन दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पहले ही वारंट-B जारी कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद, अब दोनों आरोपी अगले दो सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
फर्जी फर्मों के जरिए चलता था 12 करोड़ का कारोबार
1. विनोद अग्रवाल की भूमिका: कानपुर के पटकापुर निवासी विनोद अग्रवाल मेसर्स अग्रवाल ब्रदर्स का प्रोपराइटर है। पुलिस विवेचना में सामने आया कि विनोद अपनी फर्जी फर्म के माध्यम से कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी में संलिप्त था। उसने प्रयागराज के करेली क्षेत्र के फैजुर रहमान और एमके हेल्थ केयर के संचालक विष्णुकांत को फर्जी बिलों के जरिए बड़े पैमाने पर सिरप की आपूर्ति की थी।
2. टर्नओवर और अन्य लिंक: जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि इस अवैध कारोबार का टर्नओवर करीब 12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। आरोपी फैजुर रहमान ने अपने परिचित सौंदर्य कारोबारी सैफ अली के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके ड्रग लाइसेंस भी हासिल किया था।
3. भोला जायसवाल का कनेक्शन: भोला जायसवाल का नाम रोहनिया थाना क्षेत्र में सामने आए एक अन्य मामले से जुड़ा है। बीते वर्ष नवंबर में पुलिस ने ग्राम प्रधान के पति महेश के दो मंजिला मकान के गोदाम से 500 पेटी कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद की थी, जिसे भोला जायसवाल ने छिपाकर रखा था। इस मामले में भी भोला जायसवाल की न्यायिक रिमांड प्रभावी बनी हुई है।
करोड़ों रुपये के इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के बाद, पुलिस अब इस पूरे तस्करी रैकेट के सरगना और अन्य बड़े खिलाड़ियों की तलाश में जुटी हुई है।









