अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यूयॉर्क ले जाया गया। इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में गुस्सा और आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है।
मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए एक ऑडियो संदेश जारी किया है। अपने संदेश में उन्होंने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। गुएरा ने 5 जनवरी को लोगों से सड़कों पर उतरने और एकजुटता दिखाने की अपील की है। उन्होंने देश में राजनीतिक और सैन्य एकता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस समय सबको साथ खड़े होने की जरूरत है।
ऑडियो संदेश में गुएरा ने भावुक शब्दों में कहा, “इतिहास बताएगा कि गद्दार कौन था।” उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी PSUV एकजुट है और किसी भी हाल में हार नहीं मानेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विरोधी उन्हें कमजोर समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होगा।
इस दौरान मादुरो के बेटे ने अपनी मां की कसम खाते हुए कहा कि उनका परिवार ठीक है और शांत है। उन्होंने कहा, “हमें दुख और गुस्सा जरूर है, लेकिन हम गरिमा के साथ झंडा उठाएंगे।” अमेरिका को सीधी चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि वेनेजुएला झुकेगा नहीं और किसी भी दबाव के आगे हार नहीं मानेगा।
दूसरी ओर, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में अमेरिकी सरकार को संवाद और सहयोग के लिए आमंत्रित किया। रोड्रिगेज ने कहा कि वेनेजुएला बाहरी खतरों के बिना शांति से जीना चाहता है और अमेरिका के साथ संतुलित और सम्मानजनक संबंध बनाना उसकी प्राथमिकता है।
इस बीच अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध देखने को मिला। साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में अमेरिकी दूतावास के बाहर सिविक ग्रुप्स ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और सैन्य कार्रवाई के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। इस रैली में साउथ कोरिया में वेनेजुएला की कार्यवाहक राजदूत नताशा फारिया फर्नांडीज भी शामिल हुईं। उन्होंने अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निकोलस मादुरो की तुरंत रिहाई की मांग की।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ दो देशों के बीच टकराव नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव का संकेत देता है, जहां संवाद और शांति की जगह टकराव की आशंका गहराती जा रही है।









