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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

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बांग्लादेश में मौजूदा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। देश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। हाल ही में दीपू चंद्र दास की हत्या ने इस मुद्दे को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। इस घटना के बाद न केवल बांग्लादेश में बल्कि भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।

भारत ने इस मामले पर पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि हिंसा में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाए। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा या अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में फैल रही झूठी खबरों और भ्रामक प्रचार पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। इसी सिलसिले में भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर अपनी आपत्ति और चिंता औपचारिक रूप से दर्ज कराई है। भारत का कहना है कि बांग्लादेश सरकार को जमीन पर हालात सुधारने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

इसी बीच बांग्लादेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे हैं। उनकी वापसी को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। देश लौटते ही तारिक रहमान ने लोगों से संवाद किया और उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर नजर आए। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश की राजनीति को नई दिशा दे दी है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान की वापसी से मौजूदा यूनुस प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले समय में इसका असर चुनावी माहौल पर भी देखने को मिल सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की बात दोहराई है। भारत की चिंता यह भी है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक तनाव के बीच अल्पसंख्यकों को कोई नुकसान न पहुंचे।

विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत बांग्लादेश में हो रही हर घटना पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने दोहराया कि हिंसा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख्त सजा दिलाई जानी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए बांग्लादेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है।

कुल मिलाकर, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और भविष्य में होने वाले हर घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखेगा।