केरल विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद, सरकार और राज्यपाल आमने-सामने

Vande Mataram : केरल की नई विधानसभा के पहले ही कार्यदिवस पर ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच यह मुद्दा टकराव की पहली बड़ी वजह बनकर सामने आया है।

पूरा राष्ट्रगीत बजाने के निर्देश पर विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यपाल कार्यालय ने विधानसभा में राज्यपाल के नीतिगत संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण बजाने का निर्देश दिया। हालांकि, राज्य सरकार ने पुरानी परंपरा का पालन करते हुए केवल शुरुआती हिस्सा ही बजवाया। इस फैसले को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए।

नई सरकार और राज्यपाल के रिश्तों में तनाव के संकेत

राजनीतिक हलकों में इस घटना को नई यूडीएफ सरकार और राजभवन के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है। विधानसभा के पहले बड़े सत्र में ही इस तरह का विवाद सामने आने से आने वाले समय में दोनों पक्षों के संबंधों पर सवाल उठने लगे हैं।

भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना

भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर यूडीएफ सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया जाना चाहिए था। भाजपा ने इसे राज्यपाल कार्यालय का अपमान बताया और सरकार पर राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने का आरोप लगाया।

वाम दलों ने पहले भी जताई थी आपत्ति

इससे पहले यूडीएफ मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन होने पर वाम दलों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस तरह का प्रदर्शन राज्य की धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी परंपरा के अनुरूप नहीं है।

राजनीतिक माहौल हुआ गरम

140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत हासिल है, जबकि भाजपा ने पहली बार तीन सीटों के साथ सदन में एंट्री की है। ऐसे में ‘वंदे मातरम’ विवाद ने राज्य की राजनीति को नए सिरे से गर्मा दिया है।

 

 

 

 

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