वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा, करीब 303 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है। इसमें से करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार को लेकर यह समझौता हुआ है।
इससे अमेरिका को क्या फायदा होगा?

इस समझौते का मकसद सिर्फ जमीन के नीचे मौजूद तेल तक पहुंच बनाना नहीं है। अमेरिका की कोशिश है कि वेनेजुएला के इन तेल क्षेत्रों में निवेश करके उत्पादन बढ़ाया जाए और भविष्य की तेल आपूर्ति पर अपना प्रभाव मजबूत किया जाए। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि अमेरिका ने ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान तेल भंडार कम होने के दुष्प्रभाव देखे हैं।
वेनेजुएला को क्या फायदा होगा?
वेनेजुएला का तेल भंडार बहुत बड़ा है, लेकिन लंबे समय से कम निवेश और खराब बुनियादी ढांचे की वजह से वहां तेल उत्पादन उसकी क्षमता से काफी नीचे है। अगर अमेरिकी कंपनियां और निजी निवेशक वहां तेल उत्पादन बढ़ाने में सफल होते हैं, तो वेनेजुएला में निवेश बढ़ेगा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना में करीब 100 अरब डॉलर का निजी निवेश आ सकता है। इससे वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ सकता है और सरकार को आने वाले वर्षों में ज्यादा टैक्स राजस्व मिल सकता है। वेनेजुएला की अंतरिम सरकार ने इस समझौते से 209 अरब डॉलर से ज्यादा टैक्स राजस्व मिलने की संभावना जताई है।
यानी वेनेजुएला के लिए यह डील सिर्फ तेल बेचने का मामला नहीं है। अगर निवेश और तेल उत्पादन वास्तव में बढ़ता है, तो इससे उसकी अर्थव्यवस्था और सरकारी आय को बड़ा फायदा हो सकता है।
क्या भारत रूस से तेल का आयात बंद कर देगा?
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस लंबे समय से उसका सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है।
अगस्त 2026 के Kpler डेटा के मुताबिक, भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात करीब 21 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40% से ज्यादा है। इसी दौरान वेनेजुएला से भारत का तेल आयात करीब 3.83 लाख बैरल प्रति दिन था।
भारत के लिए वेनेजुएला का कच्चा तेल कोई नया विकल्प नहीं है। भारतीय रिफाइनरियां भारी और सल्फरयुक्त कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। इसलिए वेनेजुएला से आने वाला भारी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वेनेजुएला तुरंत रूस की जगह ले लेगा।
अमेरिका इस डील के बाद भारत से क्या चाहेगा?
अमेरिका चाहता है कि भारत Russian oil पर निर्भरता कम करे
अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल का आयात कम करने का दबाव बना रहा है। फरवरी 2026 में अमेरिका और भारत के ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा हुई थी। इसके साथ अमेरिकी पक्ष ने भारत के रूस से तेल खरीदने में कमी लाने की प्रतिबद्धता को भी जोड़ा था।
ऐसे में वेनेजुएला अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक तेल स्रोत बन सकता है।
अगर वेनेजुएला आने वाले वर्षों में अपना तेल उत्पादन बढ़ाता है, तो भारत के पास रूस के अलावा वेनेजुएला से भी ज्यादा कच्चा तेल खरीदने का विकल्प होगा।
इससे भारत को सबसे बड़ा फायदा भारत किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीद सकता है।
हालांकि, रूस से भारत को अभी भी बड़ी मात्रा में तेल मिल रहा है।और वेनेजुएला को अपना तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। इसलिए वेनेजुएला फिलहाल रूस की जगह नहीं ले सकता, लेकिन भविष्य में भारत के लिए एक अतिरिक्त विकल्प जरूर बन सकता है।