देशभर में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जहां महाराष्ट्र से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल तक तबाही के बीच एक बार फिर आपदा तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
देशभर में मानसून ने इस बार ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि करोड़ों रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं भी प्रकृति के आगे बेबस नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र से लेकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और ओडिशा तक भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई लोगों की जान गई, सड़कें और रेल मार्ग ठप हो गए और एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया कि आखिर हर साल ऐसी तबाही के बावजूद हमारी तैयारियां क्यों नाकाफी साबित होती हैं?
महाराष्ट्र में बारिश बनी आफत, 13 लोगों की मौत
महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों की लगातार बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। राज्य में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ा हादसा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट पर हुआ, जहां सुरंग के पास भारी भूस्खलन के कारण करीब 100 टन मलबा सड़क पर आ गिरा। इससे यातायात घंटों तक पूरी तरह ठप रहा और राहत कार्य में लगभग 18 घंटे लग गए।
इसी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन दो महीने पहले ही हुआ था और इसे आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण बताया गया था। लेकिन पहली ही भारी बारिश में इसके सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गईं।
पुणे में परिवार उजड़ा, कई हादसों ने बढ़ाई चिंता
पुणे जिले में भी बारिश से जुड़े कई दर्दनाक हादसे सामने आए। विसापुर किले के पास पहाड़ी का हिस्सा गिरने से एक मकान मलबे में दब गया, जिसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं पिंपरी-चिंचवड़ में दीवार गिरने से एक मजदूर की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। तेज बहाव में दो बाइक सवार भी लापता बताए जा रहे हैं।
मुंबई में ठप हुई रफ्तार
लगातार बारिश ने मुंबई की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया। कई इलाकों में जलभराव के कारण सड़कें डूब गईं, लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर भूस्खलन के चलते कई ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। हालात इतने खराब रहे कि महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी। एहतियात के तौर पर स्कूल, कॉलेज और कई सरकारी कार्यालय भी बंद रखे गए।
जम्मू-कश्मीर में चिनाब घाटी पर संकट
जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने डोडा और किश्तवाड़ जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगह बंद हो गया, जिससे आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई। किश्तवाड़ स्थित 540 मेगावाट की क्वार जलविद्युत परियोजना को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मलबे में मशीनें और वाहन दब गए, जिन्हें निकालने का काम जारी है।
हिमाचल और ओडिशा भी नहीं बचे
हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बादल फटने और भारी बारिश से पुल, सड़कें और अन्य ढांचे बह गए। चंबा में पहाड़ से चट्टान गिरने की घटना में एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि कुल्लू और शिमला सहित कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी है।
वहीं ओडिशा में भी भारी बारिश से कई शहरों में जलभराव की स्थिति बन गई है। दूसरी ओर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बारिश की कमी के कारण भीषण गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। यह बदलते मौसम के असामान्य पैटर्न की ओर भी इशारा करता है।
क्यों बार-बार फेल हो जाती हैं तैयारियां?
हर साल बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं के बावजूद आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर तक मजबूत नहीं हो पाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित निर्माण, पहाड़ी क्षेत्रों में अंधाधुंध विकास, कमजोर ड्रेनेज सिस्टम और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी ऐसे हादसों की बड़ी वजह हैं।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का हालिया हादसा भी यही सवाल उठाता है कि क्या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मौसम और भूगर्भीय जोखिमों का पर्याप्त आकलन किया जाता है? जब तक निर्माण की गुणवत्ता, शहरी जल निकासी, पहाड़ी इलाकों में विकास और आपदा प्रबंधन की रणनीति को वैज्ञानिक तरीके से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक हर मानसून ऐसी त्रासदियों का खतरा बना रहेगा।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


