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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे, सुरक्षा में लापरवाही बनी चोरी की वजह

Ram Mandir

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां, करीब 70 बार चोरी के संकेत और कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि जांच अभी जारी है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है. रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं. एसआईटी ने साफ कहा है कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी और गबन हुआ है. जांच में यह भी सामने आया कि सुरक्षा नियमों में ढील दिए जाने की वजह से आरोपियों को चोरी करने का मौका मिला. हालांकि, यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है आगे की जांच अभी भी जारी है।

सुरक्षा नियम कमजोर होने से बढ़ा चोरी का खतरा

एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, 6 फरवरी 2025 को चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई थी. इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में कौन-कौन लोग प्रवेश करेंगे, कर्मचारियों की एंट्री कैसे होगी, वे किस तरह की वर्दी पहनेंगे और अंदर जाने से पहले तथा बाहर निकलने के बाद उनकी तलाशी ली जाएगी. लेकिन बाद में इन नियमों में बदलाव कर दिए गए. अनिवार्य तलाशी की जगह केवल नियमित या रैंडम जांच का प्रावधान कर दिया गया. एसआईटी का कहना है कि इसी ढील का फायदा उठाकर आरोपी चढ़ावे से पैसे निकालने में सफल रहे. रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में इन सुरक्षा नियमों को कमजोर किया गया. एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि 27 अप्रैल 2025 से पहले भी चढ़ावे की चोरी होती रही थी. हालांकि उस समय के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण यह पता नहीं चल पाया कि कुल कितना नुकसान हुआ. जांच अधिकारियों ने आरोपियों के बयान, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच की. इससे संकेत मिले कि चोरी लंबे समय से चल रही थी. कुछ आरोपियों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक रकम मिलने के बाद एसआईटी का शक और मजबूत हुआ।

सीसीटीवी में करीब 70 बार चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड

उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच में एसआईटी को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले. SIT रिपोर्ट के मुताबिक, गणना कक्ष में काम करने वाले कर्मचारियों को करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले पैसे छिपाते हुए देखा गया. एसआईटी ने माना कि यह सिर्फ एक-दो घटनाएं नहीं थीं, इसके अलावा भी चोरी होती रही थी. इससे साफ है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं थी. जांच में सामने आया कि गणना कक्ष में ट्रस्ट और बैंक, दोनों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे. इसके बावजूद चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं. एसआईटी ने पाया कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जा रही थी. निजी सामान पर पूरी तरह रोक नहीं थी और चढ़ावे की गिनती तय प्रक्रिया के अनुसार नहीं हो रही थी. नोटों का मूल्यवार रिकॉर्ड और प्रत्येक हुंडी का अलग-अलग हिसाब भी ठीक से नहीं रखा जा रहा था. इन सभी कमियों का फायदा आरोपियों ने उठाया।

अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल, सुभाष श्रीवास्तव को माना गया ज़िम्मेदार

SIT रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. एसआईटी के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को उन्हें मंदिर के दान और चढ़ावे की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी. उनका काम था कि बैंक के साथ मिलकर बनाए गए नियमों का पूरी तरह पालन कराया जाए और समय-समय पर व्यवस्था की समीक्षा की जाए. लेकिन उनकी ओर से प्रभावी निगरानी और लगातार निरीक्षण नहीं किया गया. इसी वजह से इन घटनाओं को समय रहते रोका नहीं जा सका.
एसआईटी ने गणना कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना है. जांच के अनुसार, उनकी जिम्मेदारी थी कि गणना कक्ष में सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन हो. लेकिन कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं हुई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं. इसी कारण उन्हें प्रमुख रूप से उत्तरदायी माना गया है. जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया है. एसआईटी ने उनकी भूमिका को गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच करने की सिफारिश की है. इसके अलावा गणना कक्ष में मौजूद अन्य पर्यवेक्षण कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है. एसआईटी ने अपनी जांच के आधार पर पहले ही आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी. अब रिपोर्ट में गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर विस्तृत जांच करने की बात कही गई है।

चंपत राय और गोपाल राव का रिपोर्ट में जिक्र नहीं

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है. इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या एसआईटी ने उन्हें शुरुआती जांच में क्लीन चिट दी है या उनकी भूमिका की जांच अभी जारी है। फिलहाल रिपोर्ट इस संबंध में कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं करती।

जांच अभी जारी, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और अभी कई पहलुओं की जांच जारी है. ट्रस्ट ने भी कहा है कि चोरी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए मंदिर की चढ़ावा गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

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