इंडोनेशिया दौरे पर पीएम मोदी ने स्वतंत्र और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक का समर्थन दोहराते हुए कई अहम समझौते किए, जबकि राष्ट्रपति प्रबोवो ने उनके विकास मॉडल की खुलकर सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का संदेश देते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, नियम आधारित व्यवस्था और खुले समुद्री मार्गों की वकालत की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब China की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को लेकर कई देशों की चिंता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत स्वतंत्र, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थक है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करना चाहिए और समुद्री मार्ग सभी के लिए खुले रहने चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि वैश्विक तनाव के इस दौर में बातचीत और कूटनीति ही समस्याओं का सबसे प्रभावी समाधान है।
राष्ट्रपति प्रबोवो ने की मोदी की खुलकर तारीफ
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनके कामकाज और विकास मॉडल से प्रेरित हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं आपका करियर कॉपी करता हूं।” इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
प्रबोवो ने कहा कि मोदी सरकार की कई योजनाएं सफल रही हैं और इंडोनेशिया भी उनसे सीख लेकर उन्हें लागू करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छी बात यह है कि इन योजनाओं पर कोई “कॉपीराइट” नहीं है।
भारत-इंडोनेशिया के बीच 20 समझौते
जकार्ता में दोनों देशों के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें सबसे चर्चित रक्षा समझौता रहा, जिसके तहत भारत इंडोनेशिया को अतिरिक्त BrahMos missile मिसाइलें उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है, इसके अलावा दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), स्टील, रेयर अर्थ मैग्नेट, अंतरिक्ष सहयोग, डिजिटल भुगतान, चुनावी सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत करने का फैसला किया।
इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला
इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो ने प्रधानमंत्री मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताते हुए इंडोनेशिया की जनता और सरकार का आभार व्यक्त किया।
संसद में साझा विरासत का किया जिक्र
इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्र से ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की जड़ें Ramayana और Mahabharata जैसी महान परंपराओं में हैं, उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़, बाली जात्रा जैसे उत्सव और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत इस संबंध की गहराई को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र दोनों देशों के बीच दूरी नहीं बल्कि एक सेतु का काम करता है।
व्यापार और तकनीक पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में इंडोनेशिया का महत्वपूर्ण साझेदार बनेगा, दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनाई है, जिससे भारत का UPI इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जुड़ सकेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार व यात्रा आसान होगी।
चीन की गतिविधियों पर क्यों है नजर?
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी सैन्य और समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर चीन अपना दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं, चीन द्वारा कृत्रिम द्वीपों पर सैन्य ढांचा विकसित करने और कई बार क्षेत्रीय देशों के जहाजों के साथ टकराव की घटनाओं के बाद भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका समेत कई देशों ने नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और स्वतंत्र नौवहन की आवश्यकता पर जोर दिया है, प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा को इसी व्यापक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जहां रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक संबंधों को एक साथ मजबूत करने पर दोनों देशों ने सहमति जताई।


