संजू सैमसन को टीम से बाहर करने पर पार्थिव पटेल ने उठाए सवाल, वैभव सूर्यवंशी की एंट्री पर आलोचना।
भारतीय क्रिकेट टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को प्लेइंग-11 से बाहर किए जाने के बाद से टीम मैनेजमेंट को चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों का तर्क है कि इसी खिलाड़ी ने टी20 विश्व कप जिताने में टीम के लिए अहम भूमिका निभाई थी और वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी रहे थे, भले ही उन्होंने वहां सारे मैच नहीं खेले थे। हालांकि, लगातार तीन मैचों में उनके बल्ले से रन नहीं निकले, जिसके बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच की प्लेइंग-11 से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। संजू सैमसन की जगह टीम में युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू कराया गया, लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम के नतीजे नहीं बदल रहे हैं और टीम इंडिया लगातार पांच मैच हार चुकी है। इस खराब प्रदर्शन के कारण कप्तान श्रेयस अय्यर और हेड कोच गौतम गंभीर भी आलोचकों के सीधे निशाने पर आ गए हैं। इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर पार्थिव पटेल का भी एक बड़ा बयान सामने आया है, जिन्होंने इस चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संजू सैमसन को बाहर करना तर्क और प्रदर्शन के खिलाफ: पार्थिव पटेल
पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल का मानना है कि अगर क्रिकेटिंग लॉजिक (तर्क) और प्रदर्शन के आंकड़ों को देखा जाए, तो संजू सैमसन को प्लेइंग-11 से बाहर करने का फैसला समझ से परे है। उन्होंने टीम मैनेजमेंट द्वारा वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के फैसले को पूरी तरह से ‘भावनात्मक’ रूप से लिया गया फैसला करार दिया है। गौरतलब है कि वैभव सूर्यवंशी ने 4 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। अपने पहले मैच में 14 रन बनाने वाले वैभव ने दूसरे मैच में 13 और तीसरे मैच में 15 रन की पारियां खेलीं। वहीं अगर संजू सैमसन के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें, तो उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ पहले मैच में पांच रन बनाए थे, जबकि दूसरे मैच में वह खाता भी नहीं खोल सके थे और इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में वह केवल एक रन बनाकर आउट हो गए थे, जिसके बाद उन्हें ड्रॉप कर दिया गया था।
हर बार संजू सैमसन पर ही क्यों गिरती है गाज
जियोहॉटस्टार पर एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए पार्थिव पटेल ने संजू सैमसन के करियर के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन के 11 से 12 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में हमेशा उनकी निरंतरता (कन्सिस्टेंसी) को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं और इसी वजह से उन्हें कई बार भारतीय टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा है, लेकिन इस बार की स्थिति पुरानी परिस्थितियों से काफी अलग है। पार्थिव ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर बार गाज संजू सैमसन पर ही क्यों गिरती है और हर बार उन्हीं को क्यों बाहर किया जाता है। उन्होंने मैनेजमेंट की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले सैमसन को बाहर करने के पीछे तेजी से रन न बनाना एक मुख्य कारण बताया जाता था, लेकिन मैनेजमेंट एक ही खिलाड़ी के लिए अलग-अलग पैमानों और मानदंडों पर फैसला नहीं ले सकता है।
भावनात्मक बनाम तार्किक फैसला और फैंस की मानसिकता
पार्थिव पटेल ने स्पष्ट किया कि भावनात्मक रूप से वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल करना एक सही और सराहनीय फैसला लग सकता है, क्योंकि वह भारतीय क्रिकेट का एक बेहद प्रतिभाशाली और युवा चेहरा हैं। लेकिन अगर टीम का चयन पूरी तरह से प्रदर्शन, आंकड़ों और ठोस तर्क के आधार पर किया जाता, तो संजू सैमसन को बाहर बैठने का कोई मजबूत या ठोस कारण नजर नहीं आता है। इसके साथ ही उन्होंने क्रिकेट फैंस की मानसिकता पर भी एक दिलचस्प टिप्पणी की। पार्थिव ने कहा कि जब टी20 वर्ल्ड कप की टीम में श्रेयस अय्यर का चयन नहीं हुआ था, तब फैंस लगातार सवाल उठा रहे थे कि उन्हें क्यों नहीं चुना गया। अब जबकि श्रेयस अय्यर टीम में वापस आ चुके हैं और कप्तानी कर रहे हैं, तो लोग रजत पाटीदार को टीम में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल प्रेमियों के बीच हमेशा यह एक आम धारणा बनी रहती है कि जो खिलाड़ी टीम से बाहर बैठा है, वह मैदान पर खेल रहे खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।


