नई दिल्ली: प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के बाद विपक्षी गठबंधन INDI के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। NEET और छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस के अलग प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। वहीं बीजेपी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके रुख पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस ने छात्रों के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं की मौजूदगी में धरना दिया। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी कांग्रेस के समर्थन में पहुंचे। हालांकि, इस प्रदर्शन से AAP ने दूरी बनाए रखी और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से स्थिति संभालने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी से बातचीत कर धरना समाप्त करने का आग्रह किया। सरकार का दावा है कि राहुल गांधी ने पहले संसद में NEET और छात्र आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग रखी थी, लेकिन चर्चा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई शर्त जोड़ दी।
इस पूरे घटनाक्रम पर AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रदर्शन ने CJP के आंदोलन को कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कांग्रेस के धरने को प्राथमिकता देकर असली आंदोलन का ध्यान भटकाया। इसके जवाब में कांग्रेस नेता बी. वी. श्रीनिवास ने AAP पर पलटवार करते हुए सवाल उठाए कि उसके आरोप किसके इशारे पर लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोका, उसी पुलिस ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब तक पहुंचने दिया। उन्होंने इसे कांग्रेस और बीजेपी के बीच मिलीभगत का संकेत बताया।
AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक महीने तक चल रहे CJP आंदोलन के दौरान सरकार का कोई मंत्री जंतर-मंतर नहीं गया, लेकिन राहुल गांधी के धरने के एक घंटे के भीतर दो केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होने के बजाय अलग राजनीतिक संदेश देना चाहते थे।
वहीं, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
RJD सांसद मनोज झा ने प्रदर्शन को सत्ता के लिए सीधी चुनौती बताते हुए कहा कि यह लोगों का स्वतःस्फूर्त जनसमर्थन है और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।
उधर, बीजेपी सांसद मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष संसद में रचनात्मक बहस करने के बजाय केवल हंगामा और प्रदर्शन की राजनीति कर रहा है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुद्दों का समाधान संसद के भीतर चर्चा से होना चाहिए, न कि सड़कों पर टकराव से।