West Bengal Delimitation: केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण लागू होने की संभावना के बीच पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों की संख्या 294 से बढ़कर 400 के पार पहुंच सकती है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नई विधानसभा इमारत बनाने का संकेत दिया है और विधानसभा अध्यक्ष से इसके लिए उपयुक्त जमीन तलाशने को कहा है।
नई विधानसभा भवन की जरूरत क्यों?
बजट सत्र के दौरान धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परिसीमन और महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू होता है, तो मौजूदा विधानसभा भवन में सभी विधायकों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह संसद के लिए नया भवन बनाया गया, उसी तरह पश्चिम बंगाल को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नई विधानसभा इमारत की आवश्यकता होगी।
294 से बढ़कर 400 से ज्यादा हो सकती हैं सीटें
मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल राज्य विधानसभा में 294 सीटें हैं। लेकिन परिसीमन और महिला आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या 400 से अधिक हो सकती है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से सभी राजनीतिक दलों के साथ संभावित स्थानों का निरीक्षण करने और लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर प्रारंभिक योजना तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि परियोजना के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
न्यू टाउन में पहले से आवंटित है 40 एकड़ जमीन
नई विधानसभा परिसर के लिए न्यू टाउन में 40 एकड़ जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। प्रस्तावित परिसर में नई विधानसभा इमारत के साथ-साथ विधायकों के आवास और विधानसभा सचिवालय बनाने की योजना भी शामिल है। सरकार का कहना है कि नया भवन आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
मौजूदा विधानसभा भवन रहेगा हेरिटेज
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान विधानसभा भवन एक हेरिटेज स्ट्रक्चर है। भविष्य में इसका किस तरह उपयोग होगा, इसका फैसला समय के साथ किया जाएगा, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान बरकरार रहेगी।
पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर की सुविधाओं में सुधार की बात भी कही। उन्होंने विधायकों के लिए बेहतर आवास, कैंटीन की गुणवत्ता बढ़ाने और नए सदस्यों को विधानसभा पुस्तकालय का अधिक उपयोग करने की सलाह दी। इसके अलावा, उन्होंने एक नई वेबसाइट शुरू करने की घोषणा की, जिसमें विधायकों की उपस्थिति और सदन में उनके कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि विधानसभा की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।