JSSC-CGL Protest: झारखंड में JSSC-CGL समेत 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के फैसले को मनमाना बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो वे अदालत का रुख करेंगे।
‘हमें जांच के दायरे में लाकर दोष साबित करें’
प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि बिना सभी उम्मीदवारों को जांच के दायरे में लाए नियुक्तियां रद्द करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह प्राकृतिक न्याय नहीं है। हमें जांच के दायरे में लाइए और हमारा दोष साबित कीजिए। आप हमें ऐसे ही नहीं हटा सकते। यह पूरी तरह मनमाना आदेश है।”
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा पास करने के बाद उन्हें नियुक्तियां मिली थीं और उन्होंने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों की कथित अनियमितताओं की सजा सभी सफल अभ्यर्थियों को देना उचित नहीं है।
‘हमें ये नौकरियां दान में नहीं मिली थीं’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो वे नौकरी बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। एक सफल अभ्यर्थी ने कहा, “हमें ये नौकरियां दान में नहीं मिली थीं। हम अपनी नौकरी वापस पाने के लिए हर संभव रास्ता अपनाएंगे।”
अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि नियुक्ति मिलने के भरोसे में कई उम्मीदवारों ने दूसरी नौकरियां छोड़ दी थीं। कुछ अभ्यर्थी दूसरी सरकारी भर्तियों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तक में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें JSSC-CGL में नियुक्ति मिल चुकी थी।
‘सभी अभ्यर्थियों को एक ही तराजू से न तौलें’
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है तो दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों को एक साथ दोषी मानना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर अभ्यर्थी की भूमिका और रिकॉर्ड की अलग-अलग जांच की जानी चाहिए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार को यह देखना चाहिए कि कौन उम्मीदवार वास्तव में अनियमितता में शामिल था और कौन पूरी तरह निर्दोष है। “आप सभी को एक ही तराजू से नहीं तौल सकते,” प्रदर्शनकारी ने कहा।
‘सरकारी दफ्तरों में जाने से भी रोका जा रहा’
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि जिन दफ्तरों में वे कुछ दिन पहले तक काम कर रहे थे, अब उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भीड़ के दबाव में फैसला लिया है और अब न्याय के लिए अदालत ही उनका आखिरी सहारा है।
प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई थी और अब न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना ही हमारा एकमात्र रास्ता है।”
हेमंत सरकार ने 44 भर्ती परीक्षाएं कीं रद्द
दरअसल, झारखंड सरकार ने मंगलवार रात 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी की थी। छात्रों के लगातार विरोध के बीच सरकार की ओर से देर रात आठ अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए गए। सरकार ने इन परीक्षाओं को कथित अनियमितताओं के चलते रद्द करने की जानकारी दी।
रद्द की गई परीक्षाओं में 2014 के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की ओर से आयोजित की गई परीक्षाएं भी शामिल हैं।
अब सड़क से अदालत तक जाएगी लड़ाई
JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों के विरोध के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सफल उम्मीदवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने रद्दीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाकर अपनी नियुक्तियां बचाने की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।