दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में पैरासेल द्वीप समूह के यागोंग द्वीप पर तीन नए ढांचे नजर आए हैं। इनका निर्माण हाल के महीनों में तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये ढांचे रडार स्टेशन या निगरानी केंद्र हो सकते हैं, हालांकि अभी इनके वास्तविक इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यागोंग द्वीप पर क्या बना रहा चीन?
17 अगस्त 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में यागोंग द्वीप पर तीन नए निर्माण साफ दिखाई दे रहे हैं। उपलब्ध तस्वीरों के मुताबिक यहां निर्माण कार्य मार्च-अप्रैल के आसपास शुरू हुआ था। यागोंग द्वीप एंटीलोप रीफ से करीब 14 किलोमीटर दूर है, जहां चीन पहले ही बड़े पैमाने पर निर्माण कर चुका है।
विशेषज्ञों की नजर सबसे ज्यादा इन तीन नए ढांचों पर है। इनका आकार और बनावट दक्षिण चीन सागर के दूसरे इलाकों में मौजूद कुछ रडार और निगरानी केंद्रों से मिलती-जुलती बताई जा रही है। अगर यहां रडार स्टेशन स्थापित किया जाता है तो चीन आसपास के समुद्री इलाके और हवाई गतिविधियों पर नजर रखने की अपनी क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
हालांकि, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डेमियन सायमन ने इसे निश्चित रूप से रडार स्टेशन बताने में सावधानी बरती है। सिंगापुर के सुरक्षा विशेषज्ञ कॉलिन कोह के मुताबिक यह कोई छोटा निगरानी केंद्र भी हो सकता है, लेकिन मौजूदा तस्वीरों के आधार पर रडार स्टेशन होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एंटीलोप रीफ पर भी चीन का बड़ा निर्माण
यागोंग द्वीप से करीब 14 किलोमीटर दूर एंटीलोप रीफ पर चीन का निर्माण इससे कहीं बड़ा है। सैटेलाइट तस्वीरों में यहां करीब 6 किलोमीटर लंबा कृत्रिम द्वीप दिखाई देता है। इसकी सीधी तटरेखा तीन किलोमीटर से ज्यादा लंबी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में इस सीधी जमीन का इस्तेमाल रनवे के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर यहां सैन्य अड्डा बनाने की बात नहीं कही है।
चीन का दावा है कि एंटीलोप रीफ पर मौजूद ढांचे मौसम संबंधी जानकारी जुटाने, मछली पालन की सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे उद्देश्यों के लिए बनाए गए हैं। यागोंग द्वीप पर हालिया निर्माण को लेकर चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दक्षिण चीन सागर में क्यों बढ़ रही है टेंशन?
दक्षिण चीन सागर दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों पर चीन के अलावा वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई भी दावा करते हैं। पैरासेल द्वीप समूह पर चीन का नियंत्रण 1974 से है, जबकि वियतनाम भी इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
ऐसे में चीन की ओर से नए ढांचों का निर्माण केवल सामान्य विकास गतिविधि है या इसके पीछे कोई रणनीतिक मकसद है, इस पर नजर बनी हुई है। खासकर तब, जब चीन पहले भी दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों और सैन्य सुविधाओं का विस्तार कर चुका है।
क्या यह युद्ध की तैयारी है?
फिलहाल इन तीन ढांचों को सीधे युद्ध की तैयारी से जोड़ना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इनका इस्तेमाल निगरानी और रडार सिस्टम के लिए किया जा सकता है, लेकिन इनका अंतिम उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले समय में नई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चल सकता है कि यागोंग द्वीप पर चीन किस तरह की सुविधा विकसित कर रहा है।
हालांकि, अगर यहां अत्याधुनिक निगरानी या रडार प्रणाली स्थापित होती है तो इससे दक्षिण चीन सागर में चीन की समुद्री और हवाई गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता जरूर बढ़ सकती है। यही वजह है कि यागोंग द्वीप पर नजर आए ये तीन रहस्यमयी ढांचे फिलहाल पूरे क्षेत्र के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बने हुए हैं।