चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान आम लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार की ओर से ड्यूटी फ्री चीनी आयात की अनुमति दिए जाने के बाद घरेलू बाजार में चीनी के दाम तेजी से नीचे आए हैं। एक्स-मिल कीमतों में करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर काबू पाना है।
चीनी पहुंच गयी थी 67 रुपये किलो
कुछ दिन पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। कीमत करीब 67 रुपये प्रति किलो तक जाने के बाद सरकार ने बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए। इनमें ड्यूटी फ्री कच्ची चीनी के आयात की अनुमति भी शामिल है। इसके बाद एक्स-मिल कीमत घटकर करीब 55 रुपये प्रति किलो रह गई है। यानी रिकॉर्ड स्तर से करीब 18 फीसदी की गिरावट आई है।
हालांकि, एक्स-मिल कीमतों में आई इस गिरावट का पूरा फायदा अभी खुदरा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। थोक बाजार में कीमतें नरम पड़ने लगी हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर चीनी के दामों में उसी अनुपात में कमी आने में समय लग सकता है।
सरकार ने 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री आयात को दी मंजूरी
चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन यानी 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है। करीब एक दशक बाद भारत ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इतने बड़े स्तर पर ड्यूटी फ्री चीनी आयात का रास्ता खोला है।
सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार समय रहते कीमतों को नियंत्रित करना चाहती है।
चीनी की कीमतों में तेजी क्यों आई थी?
हाल के दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। सरकार के मुताबिक कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण रहे हैं। उत्पादन में कमी, सीमित उपलब्धता और बाजार में स्टॉक को लेकर दबाव ने कीमतों को ऊपर पहुंचाया।
20 अगस्त तक देश में खुदरा चीनी की औसत कीमत करीब 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जबकि एक महीने पहले यह लगभग 48.18 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक महीने में खुदरा कीमतों में भी बड़ा उछाल आया था।
आयात से बाजार में बढ़ेगी सप्लाई
ड्यूटी फ्री आयात के फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने पोर्ट आधारित रिफाइनरियों को भी घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति दी है। इससे तत्काल करीब 3 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
हालांकि, आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन करके बाजार में उतारना होगा। विदेश से आने वाली बड़ी खेप में समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में घरेलू सप्लाई और कीमतों पर इसका असर ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
क्या आम लोगों को सस्ती मिलेगी चीनी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक्स-मिल कीमतों में 18 फीसदी की गिरावट के बाद क्या आम लोगों को भी चीनी सस्ती मिलेगी?
फिलहाल थोक और एक्स-मिल बाजार में कीमतों में कमी जरूर आई है, लेकिन खुदरा कीमतों में इसका पूरा असर अभी दिखाई नहीं दे रहा। बाजार में कीमतों का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।
इसके अलावा सरकार की ओर से जमाखोरी और स्टॉक लिमिट पर भी सख्ती की जा रही है। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकना और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रण में रखना है।
चीनी मिलों पर बढ़ सकता है दबाव
सरकार के ड्यूटी फ्री आयात के फैसले से जहां उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं चीनी मिलों और उत्पादकों पर दबाव बढ़ सकता है। आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू कीमतों में तेजी की गुंजाइश कम होगी।
इसका असर चीनी कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ सकता है। सरकार के फैसले के बाद कई चीनी कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी देखी गई थी।
फिलहाल बाजार में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ चुकी हैं। अगर आयातित चीनी की सप्लाई समय पर बाजार में पहुंचती है और घरेलू उत्पादन भी नए सीजन में बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका कितना फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलता है, यह सप्लाई और कीमतों के ट्रांसमिशन पर निर्भर करेगा।