Mumbai News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई के BKC स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) से पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक व्यक्ति के पास कथित तौर पर PMO का फर्जी आईडी कार्ड, जबकि उसके साथ मौजूद बॉडीगार्ड के पास बंदूक बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में बताई जा रही है। वह कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बता रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
PMO अधिकारी बनकर कार्यक्रम स्थल पहुंचने की कोशिश
जानकारी के मुताबिक, रोहन पारेख NMACC में आयोजित कार्यक्रम में PMO अधिकारी के तौर पर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए आयोजन स्थल पर पहले से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
सुरक्षा कर्मियों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उसके दस्तावेजों की जांच की गई। इसी दौरान उसके पास मौजूद PMO पहचान पत्र के फर्जी होने का शक हुआ। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक
पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख अकेला नहीं था। उसके साथ एक व्यक्ति बॉडीगार्ड के तौर पर मौजूद था। सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास से बंदूक बरामद होने की बात सामने आई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद हथियार लाइसेंसी है या अवैध। पुलिस हथियार के लाइसेंस और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच कर रही जांच
मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी PMO आईडी का इस्तेमाल क्यों किया गया और दोनों संदिग्धों का वास्तविक उद्देश्य क्या था। जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रोहन पारेख ने कथित आईडी कार्ड कहां से बनवाया था, उसके साथ मौजूद हथियारबंद व्यक्ति से उसका क्या संबंध है और दोनों इससे पहले किन जगहों पर गए थे।
PM मोदी के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ा मामला होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रही हैं। हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ के साथ उनके मोबाइल फोन, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य सामान की भी जांच की जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह सिर्फ फर्जी पहचान का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।