बिना ड्यूटी किए सैलरी ले रही थी विधायक की भतीजी, मेडिकल ऑफिसर पद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

बिना ड्यूटी पर आए वेतन ले रही विधायक की भतीजी और मेडिकल ऑफिसर पर गाज गिरी है। प्रशासन ने उसे पद से सस्पेंड कर दिया है।

कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लिनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरागल विवादों में हैं। उन पर आरोप है कि वह एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स कर रही थीं और इसी दौरान नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर भी बनी रहीं। इस दौरान उन्हें करीब 75 हजार रुपये मासिक वेतन मिलने की बात सामने आई है। मामले की जांच के बाद कर्नाटक सरकार ने उनका अनुबंध समाप्त कर दिया है। डॉ. अंकिता बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं।

मार्च से क्लिनिक से अनुपस्थित रहने का आरोप

डॉ. अंकिता यरागल बागलकोट के वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर तैनात थीं। अधिकारियों के मुताबिक, वह पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने के बाद क्लिनिक की ड्यूटी से कथित तौर पर अनुपस्थित रहीं। शिकायत सामने आने के बाद जिला पंचायत के सीईओ गजानन बाले की ओर से मामले की जांच शुरू की गई।

जांच में उनकी अनुपस्थिति और एक साथ दो जगह जुड़े रहने को लेकर सवाल उठाए गए।

बिना इस्तीफा दिए MD कोर्स करने का आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. अंकिता ने मार्च 2026 में एक निजी मेडिकल कॉलेज में MD पैथोलॉजी कोर्स में दाखिला लिया था। आरोप है कि उन्होंने मेडिकल ऑफिसर के पद से इस्तीफा दिए बिना ही यह कोर्स शुरू किया और नम्मा क्लिनिक से जुड़ी रहीं।

अधिकारियों ने इसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में काम करने वाले मेडिकल प्रोफेशनल्स के नियमों और पेशेवर आचार संहिता के संभावित उल्लंघन के तौर पर देखा है।

जांच में नहीं पहुंचीं डॉ. अंकिता

मामले की शुरुआती जांच में डॉ. अंकिता के उपस्थित नहीं होने के बाद उन्हें दोबारा नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 18 सितंबर को जिला पंचायत कार्यालय में होने वाली अगली जांच में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर वह जांच में उपस्थित नहीं होती हैं तो उनके खिलाफ एकतरफा फैसला लिया जा सकता है।

सरकार ने अनुबंध समाप्त किया

मामला सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने डॉ. अंकिता यरागल को नम्मा क्लिनिक की नौकरी से हटा दिया। जिला पंचायत सीईओ गजानन बाले ने भी उन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि अगर जांच में सरकारी धन की गलत तरीके से निकासी या वित्तीय नुकसान सामने आता है तो नियमानुसार रकम की वसूली की जा सकती है।

पिता बोले- मेरे कार्यकाल में सैलरी जारी नहीं की

डॉ. अंकिता के पिता और बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यरागल ने कहा कि उनकी बेटी की नियुक्ति उनके कार्यकाल से पहले तत्कालीन DHO डॉ. मंजुनाथ डोड्डेरी के समय हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके DHO बनने के बाद उन्होंने डॉ. अंकिता की सैलरी जारी नहीं की और उन्हें पद से हटाने के निर्देश दिए। वहीं, डॉ. अंकिता यरागल और विधायक उमेश मेटी की ओर से इस मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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