IIT बॉम्बे छात्र सुसाइड मामला: प्रोफेसर सस्पेंड, कैंपस में मचा हड़कंप, कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला?

IIT बॉम्बे के 20 साल के छात्र साहिल की खुदकुशी के मामले में संस्थान ने सख्त कदम उठाते हुए एक प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया है। इस घटना के बाद से कैंपस में विवाद गहरा गया है।

आईआईटी बॉम्बे में 20 साल के छात्र साहिल की मौत के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद संस्थान ने एक प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया है। साहिल की मौत के बाद से ही कैंपस में छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र के परिजनों और साथियों ने कुछ शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद प्रबंधन ने जांच के आधार पर यह कार्रवाई की है। इस मामले में आगे की जांच जारी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों के चलते छात्र ने यह कदम उठाया।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला?

सूर्यनारायण डुल्ला IIT बॉम्बे के Department of Energy Science and Engineering (DESE) में प्रोफेसर हैं। वह एक दशक से ज्यादा समय से संस्थान से जुड़े हुए हैं। उनका शोध मुख्य रूप से पावर सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन, कन्वर्टर कंट्रोल और एनर्जी एफिशिएंसी जैसे क्षेत्रों में है।

डुल्ला ने वर्ष 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया। इसके बाद 2002 में IIT बॉम्बे से Energy Systems Engineering में M.Tech और 2007 में IIT दिल्ली से Power Systems में PhD की। IIT बॉम्बे आने से पहले उन्होंने बेंगलुरु की Power Research and Development Consultants और हैदराबाद की Machine 2 Machine में काम किया था।

IIT बॉम्बे में क्या जिम्मेदारियां संभालीं?

प्रोफेसर डुल्ला की भूमिका केवल पढ़ाने और रिसर्च तक सीमित नहीं रही। उन्होंने संस्थान में प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। वह हॉस्टल-6 के वार्डन रह चुके हैं और Dean of Student Affairs सहित प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके हैं। वह JEE Advanced, UCEED और CEED जैसी परीक्षाओं के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं। उनके अकादमिक सम्मान में IIT बॉम्बे के Excellence in Teaching Award और Young Faculty Award सहित कई सम्मान शामिल हैं।

साहिल वाकोडे मामले में कैसे आया नाम?

18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत हुई। इससे पहले वह एक मिड-सेमेस्टर परीक्षा दे रहे थे। IIT बॉम्बे के मुताबिक, परीक्षा के दौरान उन्हें कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था और संस्थान का कहना है कि प्रश्नपत्र को AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की गई थी।

उस परीक्षा में प्रोफेसर डुल्ला कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर थे। संस्थान के अनुसार, परीक्षा में कथित अनियमितता की जानकारी उन्होंने अधिकारियों को दी थी। इसके बाद छात्र की संबंधित इंस्ट्रक्टर और विभागाध्यक्ष ने काउंसलिंग की थी। IIT बॉम्बे का कहना है कि साहिल के खिलाफ उस समय कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

साहिल के परिवार ने प्रोफेसर डुल्ला और अन्य अधिकारियों पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। परिवार की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मामला दर्ज किया है और डुल्ला का नाम FIR में शामिल है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।

वहीं, IIT बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि साहिल की ओर से SC-ST सेल या प्रशासन के पास ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

छात्र आंदोलन के बाद निलंबित किए गए डुल्ला

साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया। छात्रों ने प्रोफेसर डुल्ला के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन समेत कई मांगें रखीं। 20 सितंबर को IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ बातचीत की और उनकी 18 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताई। इसके बाद डुल्ला को उनके प्रशासनिक पद से निलंबित कर दिया गया।

21 सितंबर को IIT बॉम्बे ने अपने पहले के बयान को लेकर माफी भी मांगी और कहा कि छात्र की मौत से जुड़े घटनाक्रम की परिस्थितियां संबंधित अधिकारियों की जांच के अधीन हैं।

फैकल्टी फोरम ने किया डुल्ला का समर्थन

छात्रों के आरोपों के बीच IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डुल्ला के समर्थन में बयान जारी किया। फोरम के मुताबिक, डुल्ला परीक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और कथित परीक्षा अनियमितता सामने आने के बाद संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।

इस मामले में अब पुलिस जांच और संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल प्रोफेसर डुल्ला के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अभी साबित नहीं हुए हैं

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