चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत ने दोषी पूर्व पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना है। कोर्ट ने प्रशांत पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
2018 में हुई थी विवेक तिवारी की मौत
यह मामला 28 सितंबर 2018 की रात लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार इलाके का है। उस समय एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी सना खान के साथ कार से जा रहे थे।
एफआईआर और अभियोजन के मुताबिक, गोमतीनगर विस्तार इलाके में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान प्रशांत चौधरी की गोली लगने से विवेक तिवारी की मौत हो गई थी। घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
हत्या की धारा में शुरू हुआ था मुकदमा
मामले में शुरुआत में प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में अदालत में दोनों के खिलाफ लंबे समय तक सुनवाई चली।
प्रशांत के खिलाफ IPC की धारा 304(2) के तहत गैर-इरादतन हत्या का दोष साबित हुआ। अदालत ने 17 सितंबर 2026 को उसे दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला 21 सितंबर को सुनाने की तारीख तय की थी।
करीब आठ साल बाद आया फैसला
विवेक तिवारी की मौत के करीब आठ साल बाद इस मामले में दोषी पुलिसकर्मी की सजा का ऐलान हुआ है। अदालत ने प्रशांत चौधरी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशांत इस मामले में करीब आठ साल पहले से जेल में बंद है।
संदीप कुमार को किया गया बरी
मामले के दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। उसके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही अब समाप्त हो गई है।
परिवार ने फैसले पर जताई असंतुष्टि
विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने फैसले पर असंतोष जताया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परिवार की ओर से फैसले को आगे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई है।
विवेक तिवारी की मौत के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। करीब आठ साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है।