पटना: बिहार सरकार राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पर तेजी से काम करने की तैयारी कर रही है। बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 के प्रारूप की समीक्षा के दौरान राज्य में करीब 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 12 हजार रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान जताया गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना में नीति के प्रारूप को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, इस्तेमाल, निवेश और इसके लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा हुई।
क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?
ग्रीन हाइड्रोजन ऐसा हाइड्रोजन है जिसे नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सौर और पवन ऊर्जा से बनाई गई बिजली की मदद से तैयार किया जाता है। इसके उत्पादन में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जाती है। भविष्य में इसका इस्तेमाल उद्योग, उर्वरक, रिफाइनरी, परिवहन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
बिहार में 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान
बिहार की प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति का उद्देश्य राज्य में इस क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना है। नीति के तहत करीब 16,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही लगभग 12,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। ये आंकड़े नीति के लक्ष्य हैं, इसलिए इन्हें वर्तमान में हो चुका निवेश या रोजगार नहीं माना जाना चाहिए।
2031 तक उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
प्रस्तावित नीति में बिहार को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के एक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उपलब्ध नीति दस्तावेज के अनुसार राज्य में 2031 तक हर साल करीब 1 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उत्पादन इकाइयों के साथ-साथ बिजली, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं का ढांचा तैयार करना होगा।
बरौनी रिफाइनरी पर भी फोकस
बैठक में मुख्यमंत्री ने बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के अधिकारियों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए। सरकार यह भी देखना चाहती है कि बरौनी के अलावा बिहार के दूसरे हिस्सों में ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र लगाने की कितनी संभावनाएं हैं। इसके लिए संबंधित उद्योगों और संस्थानों के साथ मिलकर आगे की योजना तैयार करने को कहा गया है।
सिर्फ उत्पादन नहीं, इस्तेमाल पर भी जोर
सरकार की योजना केवल ग्रीन हाइड्रोजन बनाने तक सीमित नहीं है। इसके उत्पादन और उपयोग दोनों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके लिए ऐसे उद्योगों की पहचान की जाएगी जहां हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे राज्य में एक ऐसा तंत्र विकसित करने की कोशिश होगी जिसमें उत्पादन से लेकर उपयोग तक अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ा जा सके।
देश के राष्ट्रीय लक्ष्य से भी जुड़ी योजना
बिहार की प्रस्तावित नीति देश के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से भी जुड़ी है। राष्ट्रीय मिशन के तहत वर्ष 2030 तक देश में हर साल कम से कम 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार की नीति इसी बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र को बढ़ाने की दिशा में तैयार की जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या होगा फायदा?
नीति का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े निवेश को बिहार की ओर आकर्षित करना है। इसके लिए सरकार उत्पादन इकाइयों और जरूरी आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दे रही है। पहले से जारी नीति प्रारूप में निवेशकों के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान करने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रावधानों का उल्लेख है।
रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद
ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र लगाने के साथ कई तरह के रोजगार पैदा हो सकते हैं। इनमें संयंत्र संचालन, तकनीकी काम, रखरखाव, बिजली और इंजीनियरिंग से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं। करीब 12 हजार रोजगार का आंकड़ा नीति से जुड़ा अनुमान है। वास्तविक रोजगार की संख्या परियोजनाओं के आकार और उनके लागू होने की गति पर निर्भर करेगी।
बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नीति?
ग्रीन हाइड्रोजन को आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा के महत्वपूर्ण विकल्पों में गिना जा रहा है। बिहार सरकार की प्रस्तावित नीति का उद्देश्य इसी क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाना है। अगर नीति के तहत प्रस्तावित परियोजनाएं जमीन पर आती हैं, तो इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, उद्योग और रोजगार से जुड़े नए अवसर बन सकते हैं। फिलहाल बिहार सरकार नीति के प्रारूप और उसके क्रियान्वयन की तैयारी पर काम कर रही है। आगे परियोजनाओं की घोषणा और निवेश आने के साथ इसकी वास्तविक तस्वीर साफ होगी।