बिहार के जमुई सदर अस्पताल में कुछ घंटों के अंतराल में दो महिलाओं की मौत के बाद हंगामा मच गया. परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर की कथित अनुपस्थिति और समय पर इलाज नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं. मामला सामने आने के बाद बिहार सरकार की मंत्री और जमुई विधायक श्रेयसी सिंह अस्पताल पहुंचीं और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई. वहीं, जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है.
कुछ घंटों में दो महिलाओं की मौत
पहला मामला 28 वर्षीय अनिता कुमारी का है. परिजनों के मुताबिक, प्रसव पीड़ा के बाद उन्हें पहले खैरा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, जहां से बेहतर इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल रेफर किया गया. परिवार के अनुसार, वह रात करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचीं, लेकिन वहां महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थीं. रविवार सुबह करीब 5 बजे उनकी मौत हो गई. दूसरा मामला 26 वर्षीय आस्था कुमारी का है. परिजनों के मुताबिक, शनिवार को उनका सी-सेक्शन हुआ था और उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया. ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद रात में उनकी तबीयत बिगड़ी. परिवार का आरोप है कि महिला डॉक्टर उपलब्ध नहीं थीं. इलाज के बाद कुछ समय के लिए हालत में सुधार हुआ, लेकिन रविवार सुबह करीब 10 बजे उनकी मौत हो गई.
डॉक्टर की गैरमौजूदगी का लगाया आरोप
दोनों मामलों में परिजनों ने आरोप लगाया कि रात की ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं थीं. उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में डॉक्टर को बुलाने की कोशिश की गई, लेकिन समय पर चिकित्सकीय मदद नहीं मिल सकी. अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों की जांच शुरू कर दी है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. थनीष कुमार ने कहा कि “अगर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप सही पाया जाता है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी”.
अस्पताल पहुंचीं श्रेयसी सिंह, अधिकारियों को लगाई फटकार
घटना की जानकारी मिलने के बाद मंत्री श्रेयसी सिंह जमुई सदर अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने मृत महिलाओं के परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. इसके बाद उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से जवाब मांगा और कथित लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई. रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्री ने ड्यूटी पर डॉक्टर की मौजूदगी और मरीजों की समय पर निगरानी को लेकर अस्पताल प्रबंधन से सवाल किए. उन्होंने दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं.
परिजनों ने अस्पताल गेट पर किया प्रदर्शन
दोनों मौतों के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. रिपोर्टों के अनुसार, आक्रोशित परिवारों ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर शव रखकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. परिवारों का आरोप था कि यदि समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप मिलता तो स्थिति अलग हो सकती थी. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
डीएम ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है. समिति की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त करेंगे. इसमें सिविल सर्जन और वरीय उप समाहर्ता सावन कुमार को सदस्य बनाया गया है. समिति को पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच में इलाज के दौरान डॉक्टरों की उपलब्धता, कथित अनुपस्थिति और किसी भी चिकित्सकीय या प्रबंधकीय लापरवाही की जांच की जाएगी.
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल दोनों मौतों के लिए किसी डॉक्टर को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया नहीं गया है. अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इलाज में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं. मंत्री श्रेयसी सिंह ने मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है. अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है.