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रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप की भारत को खुली चेतावनी: क्या टैरिफ के दबाव में झुकेगा भारत?

भारत-रूस तेल आयात पर अमेरिका का विरोध

जब से डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव साफ दिखाई दे रहा है। चाहे वह टैरिफ का मामला हो या H-1B वीज़ा पॉलिसी, ट्रंप लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने भारत को खुली चेतावनी दी है कि अगर वह रूस से तेल आयात करना बंद नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय सामानों पर और अधिक टैरिफ लगा सकता है। सवाल यह है कि क्या भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर लगाकर अमेरिका की बात मानेगा?

ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भारत को सस्ता रूसी तेल खरीदने से रोकना है, ताकि भारत मजबूरन महंगा अमेरिकी तेल खरीदने को तैयार हो जाए। अमेरिका पहले ही भारत पर 50% टैरिफ लगा चुका है, जिसमें 25% रेसिप्रोकल और 25% पेनल्टी शामिल है। एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी को खुश रखना आवश्यक है, अन्यथा टैरिफ बढ़ा दिया जाएगा। यह स्पष्ट रूप से भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति है ताकि वह अपनी ऊर्जा नीति बदले।

धमकियों के बावजूद, भारत ने कड़ा रुख अपनाया है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। नवंबर 2025 में, भारत ने औसतन 1.8 मिलियन बैरल रूसी तेल प्रतिदिन खरीदा, जो पिछले छह महीनों में सबसे अधिक था। वर्तमान में, रूस से भारत का तेल आयात हमारी कुल तेल की जरूरत का लगभग 35% हिस्सा है। यदि भारत महंगा तेल खरीदता है, तो देश में महंगाई बढ़ना तय है। यही वजह है कि भारत अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने रुख पर कायम है।

भारत ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपनी व्यापारिक रणनीति में भी बदलाव किया है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूएई जैसे कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इसके अलावा, ज्वेलरी, टेक्सटाइल और फार्मास्यूटिकल जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाया गया है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को लेकर हाल ही में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का मकसद भी तेल की राजनीति से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि भारत महंगा अमेरिकी तेल खरीदे, जबकि भारत सस्ते विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।

भारत लगातार अपने आर्थिक हितों, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। सस्ते तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत, अमेरिका के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। आने वाले महीनों में, ट्रेड डील और तेल के मसले पर भारत और अमेरिका के बीच चल रही रणनीतिक बातचीत पर वैश्विक बाजार की नजर बनी रहेगी।

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