लोकल छुट्टियों के कारण बार-बार बंद हो रहा शेयर बाजार, एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल

चुनाव के कारण बाजार बंद
चुनाव के कारण बाजार बंद

देश के प्रमुख शेयर बाजारों (BSE और NSE) में अक्सर स्थानीय चुनावों या अन्य लोकल छुट्टियों के कारण कामकाज प्रभावित होता है। हाल ही में महाराष्ट्र में हुए एक चुनाव के चलते बाजार पूरी तरह बंद रहा था। इस तरह की बार-बार की ट्रेडिंग छुट्टियों को लेकर अब बाजार के जानकारों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में इन फैसलों की समीक्षा की मांग की है।

15 जनवरी यानी आज महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के मद्देनजर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में पूरे दिन के लिए ट्रेडिंग बंद रहेगी ।

शुरुआत में एक्सचेंजों द्वारा इसे केवल ‘सेटलमेंट हॉलिडे’ घोषित किया गया था, जिसका अर्थ था कि केवल पैसों और शेयरों का लेन-देन रुका रहेगा। लेकिन राज्य में बैंकों की छुट्टी की घोषणा के बाद एक्सचेंजों को नया सर्कुलर जारी करना पड़ा और इसे अनिवार्य रूप से ‘फुल ट्रेडिंग हॉलिडे’ में बदल दिया गया।

बाजार के जानकारों का कहना है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में, बार-बार लोकल छुट्टियों के कारण बाजार बंद होने से विदेशी फंड हाउसों और बड़े निवेशकों को हेजिंग (जोखिम प्रबंधन) और महत्वपूर्ण ट्रेडिंग करने में भारी दिक्कतें आती हैं।

लगातार की जा रही इन स्थानीय छुट्टियों से वैश्विक स्तर पर भारतीय बाजार की विश्वसनीयता और पहुंच पर सवाल उठते हैं।

इस आलोचना के बावजूद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और सरकार का तर्क रहा है कि चुनाव के दिनों में कर्मचारियों और मतदाताओं को वोट डालने की सुविधा देना आवश्यक होता है। उनका मानना है कि स्थानीय कानूनों का पालन करना और नागरिक सुविधा सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसके कारण कभी-कभी ट्रेडिंग बंद करनी पड़ती है।

यह बहस लगातार जारी है कि क्या भारतीय बाजारों को स्थानीय अवकाशों की कीमत पर वैश्विक मानकों के अनुरूप 24/7 ट्रेडिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, या कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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