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वृंदावन में 40 दिन का बसंतोत्सव शुरू, साल में एक बार खुलता है टेढ़े खंभे वाले मंदिर का ‘बसन्ती कमरा’

वृंदावन के टेढ़े खंभे वाले मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर सजे पीले वस्त्रों में राधा-कृष्ण के दर्शन और बसंती कमरा
वृंदावन के टेढ़े खंभे वाले मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर सजे पीले वस्त्रों में राधा-कृष्ण के दर्शन और बसंती कमरा

ब्रज का सबसे प्रमुख और मनमोहक पर्व, बसंतोत्सव, हाल ही में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पूरे वैभव के साथ शुरू हो गया है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन में इस पर्व की शुरुआत होते ही चालीस दिनों तक चलने वाले विशेष धार्मिक आयोजनों का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। इन आयोजनों में सबसे खास है वृंदावन के प्रसिद्ध ‘टेढ़े खंभे वाले मंदिर’ का वह रहस्यमय ‘बसन्ती कमरा’, जिसके दर्शन भक्तों को साल में केवल एक बार ही मिलते हैं।

बसंत पंचमी के दिन जैसे ही बसन्ती कमरा भक्तों के लिए खोला गया, वृंदावन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कमरे के भीतर दिव्य सिंहासन पर विराजमान श्री राधा-कृष्ण की अलौकिक छटा देखते ही बनती थी, जिन्होंने पीत (पीले) वस्त्र धारण किए थे। यह कमरा विदेशी झालरों, आकर्षक लाइटिंग और तरह-तरह के पुष्पों से सजाया गया था, जो बसंत ऋतु का सजीव अहसास करा रहा था।

इस बसंती कमरे को और भी दिव्य बनाने के लिए केंद्र में इटली से लाए गए विशेष पत्थरों से बने फव्वारे लगाए गए हैं, जिन्हें नहर का रूप दिया गया है। चारों ओर पुष्पों की सुगंध और भक्ति संगीत गूंजता रहा। यह कमरा सन 1863 में लखनऊ के नवाब फुंदनलाल शाह और कुंदन लाल शाह द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर विशेष रूप से अपनी टेढ़ी दीवारों और खंभों पर बनी 14 अद्भुत कलाकृतियों के लिए भी प्रसिद्ध है। बसंत पंचमी के दिन श्री राधारमण ठाकुर यहां भक्तों को विशेष बसंती दर्शन देते हैं।

मान्यता है कि साल में एक बार होने वाले इन दुर्लभ ‘बसन्ती’ दर्शनों से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी गहन विश्वास के साथ देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्तों की आस्था देखते ही बनती थी। आज के दिन ठाकुरजी को बसंत का आनंद देने के लिए विशेष श्रृंगार किया जाता है।

वृंदावन में बसंत पंचमी का यह पर्व भक्ति, परंपरा और आस्था के अद्भुत संगम को दर्शाता है, जिसने पूरे ब्रजमंडल को पीत रंग में रंग दिया।

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