विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित और शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म ‘O Romeo’ अपनी रिलीज के बाद से ही विवादों में घिरी हुई है। हाल ही में, फिल्म से जुड़ी एक अजीबोगरीब घटना सामने आई जिसने पूरे इंटरनेट को हिलाकर रख दिया। फिल्म बुकिंग प्लेटफॉर्म BookMyShow पर अचानक इस फिल्म की रेटिंग और पब्लिक रिव्यू गायब हो गए। इसके पीछे की वजह बताई गई है— ‘कोर्ट का आदेश’। यह घटना बॉलीवुड में चल रहे ‘रिव्यू कल्चर’ और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म ‘O Romeo’ में शाहिद कपूर के साथ तृप्ति डिमरी, नाना पाटेकर और विक्रांत मैसी जैसे बड़े कलाकार शामिल हैं। यह फिल्म प्यार, गैंगस्टर और बदले की भावना पर आधारित एक मसालेदार कहानी थी। 13 फरवरी को वेलेंटाइन वीक के दौरान रिलीज हुई इस फिल्म को शुरुआती दौर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिलीं। कुछ दर्शकों ने कलाकारों की एक्टिंग को सराहा, तो वहीं कुछ ने कहानी को कमजोर बताया। शुरुआती दिनों में BookMyShow पर फिल्म की रेटिंग 6.8 से 7 स्टार्स के बीच थी, जो एक न्यूट्रल प्रतिक्रिया मानी जाती है।
कोर्ट के आदेश पर रिव्यू सेक्शन बंद
यह विवाद तब और गहरा गया जब BookMyShow पर यूजर्स को रेटिंग सेक्शन में एक चौंकाने वाला संदेश दिखने लगा: “Reviews disabled as per court order” (कोर्ट के आदेश पर रिव्यू बंद)। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या मेकर्स को खराब रेटिंग्स का डर था? या फिर यह कदम ‘रिव्यू बॉम्बिंग’ (जानबूझकर संगठित रूप से गलत रेटिंग देना) से बचने के लिए उठाया गया? हालांकि, यह आदेश किस कोर्ट ने दिया, और केस किसने फाइल किया— इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
पब्लिक ओपिनियन और भावनात्मक पहलू
जहां एक ओर BookMyShow पर रिव्यू बंद कर दिए गए, वहीं फिल्म के IMDb पेज पर अभी भी दर्शकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं मौजूद हैं, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि फिल्म ‘एवरेज से थोड़ी बेहतर’ थी। इंटरनेट पर लोग इसे ‘जनता की आवाज दबाने’ की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि फेक रिव्यूज़ से बचने के लिए मेकर्स को ऐसा करना पड़ा होगा। इन सब विवादों के बीच एक भावनात्मक जानकारी सामने आई थी, जिसमें इरफान खान की पत्नी ने साझा किया था कि विशाल भारद्वाज ने यह रोल मूल रूप से दिवंगत अभिनेता इरफान खान के लिए लिखा था।
आज के डिजिटल युग में, जहां दर्शक टिकट खरीदने से पहले रिव्यू पर निर्भर रहते हैं, वहां रेटिंग का इस तरह गायब होना पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। फिल्म की सफलता अपनी जगह है, लेकिन क्या दर्शकों को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार छीनना सही है? आपकी इस पूरे विवाद पर क्या राय है, हमें कमेंट में जरूर बताएं।









