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ट्रंप दोहरी चुनौती में घिरे, ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में “No Kings” आंदोलन तेज

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक तरफ पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध है, तो दूसरी ओर देश के भीतर उनकी नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में “No Kings” यानी “कोई राजा नहीं” के बैनर तले बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनकी गूंज दुनिया के कई देशों तक पहुंची।

देशभर में लाखों लोग सड़कों पर

यह “No Kings” आंदोलन की तीसरी बड़ी लहर मानी जा रही है। आयोजकों के अनुसार, पहले जून में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोग शामिल हुए थे, जबकि इस बार करीब 90 लाख लोगों के सड़कों पर उतरने का अनुमान लगाया गया। देशभर में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी देखने को मिली।

मिनेसोटा बना विरोध का केंद्र

इस आंदोलन का मुख्य केंद्र सेंट पॉल, मिनेसोटा रहा, जहां सबसे बड़ी रैली आयोजित हुई। मशहूर गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने यहां प्रदर्शन के दौरान खास प्रस्तुति दी। इस रैली में रॉबर्ट डी नीरो, जेन फोंडा और बर्नी सैंडर्स जैसे कई बड़े नाम शामिल हुए।

किन मुद्दों पर फूटा गुस्सा?

प्रदर्शनकारियों की नाराजगी कई मुद्दों को लेकर थी। सबसे बड़ा विरोध ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति और ICE की कार्रवाई को लेकर था। इसके अलावा ईरान के साथ युद्ध, ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी लोगों ने आवाज उठाई।

अमेरिका से बाहर भी दिखा असर

यह विरोध सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। यूरोप, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी लोग सड़कों पर उतरे। लंदन, पेरिस और रोम जैसे शहरों में “No Tyrants” के बैनर के साथ प्रदर्शन हुए और युद्ध व नस्लवाद के खिलाफ नारे लगाए गए।

ट्रंप समर्थकों का पलटवार

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने इन रैलियों को “वामपंथी एजेंडा” करार दिया और कहा कि इन्हें आम जनता का समर्थन नहीं है। वहीं रिपब्लिकन नेताओं ने इन्हें “हेट अमेरिका रैली” बताया, लेकिन कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए।

सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत

इन प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका में राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म हो रहा है। एक तरफ सरकार अपनी नीतियों पर अड़ी है, तो दूसरी तरफ जनता सड़कों पर उतरकर विरोध जता रही है जिससे आने वाले समय में टकराव और बढ़ने की संभावना है।