हाल ही में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में ‘सेकंड टियर पावर’ बताया। इस टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई और अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की AI क्षमता का सही आकलन दुनिया के सामने रखा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अंतरराष्ट्रीय मंच से आईएमएफ की सोच और जानकारी को भारत के संदर्भ में पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यह समझना मुश्किल है कि आईएमएफ किस आधार पर भारत को ‘सेकंड टियर’ कह रहा है। वैष्णव ने कहा कि भारत AI में फर्स्ट ग्रुप में आता है और इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए।
उन्होंने अपनी बात के समर्थन में तथ्य पेश करते हुए कहा कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत AI पेनिट्रेशन (प्रवेश), AI तैयारियों (preparedness) और AI टैलेंट के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने आगे बताया कि AI टैलेंट के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। ऐसे में भारत को सेकंड टियर कहना सच्चाई से बहुत दूर है।
भारत की AI रणनीति पर बात करते हुए, अश्विनी वैष्णव ने समझाया कि भारत का ध्यान सिर्फ बहुत बड़े और महंगे मॉडल बनाने पर नहीं है। उन्होंने कहा कि 95 प्रतिशत काम ऐसे AI मॉडल से हो जाता है, जिनमें 20 से 50 बिलियन पैरामीटर होते हैं। भारत ऐसे कई मॉडल बना चुका है और उन्हें अलग-अलग सेक्टर में इस्तेमाल भी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का फोकस AI को सीमित लोगों तक रखने का नहीं है, बल्कि उसे बड़े पैमाने पर फैलाने का है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है, जिसमें डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग शामिल है।
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने जोर देकर कहा कि भारत एप्लीकेशन लेयर में दुनिया का सबसे बड़ा सर्विस प्रोवाइडर बनने की क्षमता रखता है, जहां एंटरप्राइज की जरूरत समझकर AI के जरिए समाधान दिए जाएंगे। दावोस के मंच से भारत ने यह साफ संदेश दिया कि उसे कम आंकना एक बड़ी गलती है और IMF को भारत की तकनीकी प्रगति पर अपनी सोच बदलने की जरूरत है।


