गुटबाजी से हिंदुत्व तक… अमित शाह का लखनऊ दौरा क्यों रहा अहम? 5 पॉइंट में समझिए

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज करनी शुरू कर दी हैं. इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लिया.
अमित शाह
अमित शाह का लखनऊ दौरा क्यों रहा अहम?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज करनी शुरू कर दी हैं. इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी का मंत्र देने के साथ पार्टी के भीतर एकजुटता, हिंदुत्व, संगठन की मजबूती और केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर कई अहम संदेश दिए…….अमित शाह ने एक तरफ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुटबाजी खत्म करने की नसीहत दी………तो दूसरी तरफ राम मंदिर और अयोध्या आंदोलन का जिक्र कर हिंदुत्व के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने अपने पुराने चुनावी अनुभव भी साझा किए और कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह बार-बार उत्तर प्रदेश आएंगे और कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों का हिसाब भी लेंगे. बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने भी स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव अमित शाह के मार्गदर्शन में लड़ा जाएगा………….ऐसे में सवाल है कि अमित शाह के इस दौरे के पांच बड़े राजनीतिक संदेश क्या रहे?

1. गुटबाजी खत्म करने और एकजुटता बनाए रखने का संदेश

अमित शाह के भाषण का सबसे अहम संदेश पार्टी के भीतर एकजुटता को लेकर रहा. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि सभी लोग चुनावी तैयारी में जुट जाएं और अगर किसी के मन में कोई मतभेद या नाराजगी है, तो उसे गोमती नदी में विसर्जित कर दें. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा चुनाव के नतीजों और हालिया एमएलसी चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश बीजेपी के संगठन और नेताओं के बीच तालमेल को लेकर चर्चाएं हो रही हैं…………..शाह ने साफ संकेत दिया कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी को अंदरूनी मतभेदों से बाहर निकलना होगा…….. उन्होंने कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनाव को अपना चुनाव मानकर काम करने और पूरी मेहनत के साथ मैदान में उतरने को कहा. संदेश स्पष्ट था कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन और चुनावी लक्ष्य को रखना होगा.

2. राम मंदिर के जरिए हिंदुत्व के मुद्दे को फिर केंद्र में लाने की कोशिश

अमित शाह ने अपने भाषण में 30 अक्टूबर 1990 की अयोध्या की घटना का विशेष रूप से जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इसी दिन रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं. शाह ने सवाल उठाया कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले किस मुंह से सरकार बनाने की बात करते हैं……………उन्होंने राम मंदिर निर्माण को बीजेपी की उपलब्धि के तौर पर पेश किया और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया. शाह ने कहा कि पांच सौ साल तक राम मंदिर नहीं बन पाया, लेकिन नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ.

इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का मुद्दा भी उठाया. शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनने पर UCC लागू किया जाएगा. इससे संकेत मिला कि पार्टी 2027 के चुनाव में विकास और कानून-व्यवस्था के साथ राम मंदिर और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को भी अपने राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दे सकती है……

3. दिल्ली और लखनऊ के बीच तालमेल का संदेश

अमित शाह के दौरे का एक अहम पहलू केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व के बीच तालमेल को लेकर भी रहा. पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश बीजेपी में केंद्रीय नेतृत्व, मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही थीं. ऐसे माहौल में शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह चुनाव के दौरान बार-बार उत्तर प्रदेश आएंगे और उनसे हिसाब भी लेंगे. उनके इस बयान से यह संदेश देने की कोशिश दिखी कि 2027 के चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय भूमिका निभाएगा………बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने भी कहा कि विधानसभा चुनाव अमित शाह के मार्गदर्शन में लड़ा जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर तावड़े ने कहा कि शाह ने योगी की कई बार तारीफ की है और समझदार को इशारा काफी है. इस तरह पार्टी ने नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय का संदेश देने की कोशिश की।

4. पुराने चुनावी प्रदर्शन का जिक्र कर संगठन मजबूत करने पर जोर

अमित शाह ने अपने भाषण में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल और उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुराने चुनावी प्रदर्शन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2014 में यूपी में बीजेपी के केवल 44 विधायक थे और कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल था. उस समय उन्होंने तहसील स्तर तक जाकर संगठन को मजबूत करने का काम किया.. शाह ने दावा किया कि संगठन की मजबूती के बाद बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में 41 फीसदी वोट हासिल किए और 73 सीटें जीतीं. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बावजूद पार्टी ने करीब 40 फीसदी वोट हासिल कर 312 सीटों पर जीत दर्ज की.

इन आंकड़ों के जरिए शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बूथ से लेकर तहसील स्तर तक संगठन मजबूत करने का संदेश दिया. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी में नेता भी सबसे पहले कार्यकर्ता हैं.

5. कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और 2027 का लक्ष्य तय करने की कोशिश

अमित शाह के लखनऊ दौरे का एक बड़ा मकसद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना भी रहा. लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटें घटने और हालिया एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के सामने 2027 की तैयारी के दौरान कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती है……….शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी अंगद का पैर है……. जिसे कोई नहीं हिला सकता. उन्होंने अर्जुन की तरह मछली की आंख पर नजर रखने और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम करने की अपील की. राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बातों का जवाब बीजेपी 2027 में देगी. साथ ही उन्होंने दोहराया कि वह चुनाव के दौरान बार-बार यूपी आएंगे और कार्यकर्ताओं से उनकी तैयारियों का हिसाब लेंगे……..इस तरह अमित शाह ने अपने भाषण के जरिए कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य याद दिलाने, संगठन को सक्रिय करने और केंद्रीय नेतृत्व की भागीदारी का भरोसा देने की कोशिश की.

अमित शाह के दौरे से निकले पांच बड़े सियासी संदेश

कुल मिलाकर अमित शाह का लखनऊ दौरा केवल संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रहा. उनके भाषण में पार्टी के भीतर एकजुटता, राम मंदिर और UCC जैसे मुद्दे, योगी सरकार के नेतृत्व को लेकर संदेश, बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और 2027 के चुनाव की तैयारी जैसे विषय प्रमुख रहे. अब देखना होगा कि बीजेपी इन संदेशों को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है.

संबंधित खबरें

गुटबाजी से हिंदुत्व तक… अमित शाह का लखनऊ दौरा क्यों रहा अहम? 5 पॉइंट में समझिए

उत्तराखंड में हवाई हादसों का काला इतिहास, केदारघाटी में 15 साल में 13 दुर्घटनाएं

खराब मौसम, 6 सवार और बदरीनाथ से उड़ान…, जानिए हेलिकॉप्टर क्रैश की पूरी कहानी

‘अंगद का पैर है कोई हिला नहीं सकता’, अमित शाह ने लखनऊ से विपक्ष को दिया संदेश

टीम इंडिया की शर्मनाक हार, 7 साल बाद न्यूजीलैंड ने घर में दी मात, फिलिप्स-डफी का जलवा

Recommended Stories

गुटबाजी से हिंदुत्व तक… अमित शाह का लखनऊ दौरा क्यों रहा अहम? 5 पॉइंट में समझिए

उत्तराखंड में हवाई हादसों का काला इतिहास, केदारघाटी में 15 साल में 13 दुर्घटनाएं

खराब मौसम, 6 सवार और बदरीनाथ से उड़ान…, जानिए हेलिकॉप्टर क्रैश की पूरी कहानी

‘अंगद का पैर है कोई हिला नहीं सकता’, अमित शाह ने लखनऊ से विपक्ष को दिया संदेश

टीम इंडिया की शर्मनाक हार, 7 साल बाद न्यूजीलैंड ने घर में दी मात, फिलिप्स-डफी का जलवा