उत्तराखंड में हवाई हादसों का काला इतिहास, केदारघाटी में 15 साल में 13 दुर्घटनाएं

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार को हुए हेलिकॉप्टर हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में हवाई सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
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उत्तराखंड में हवाई हादसों का काला इतिहास

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार को हुए हेलिकॉप्टर हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में हवाई सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई. इस घटना ने पिछले साल केदारघाटी में हुए दर्दनाक हेलिकॉप्टर हादसे की यादें भी ताजा कर दी हैं, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी.

उत्तराखंड के दुर्गम और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर संचालन कई चुनौतियों से भरा रहता है. यहां मौसम का अचानक बदलना, कम दृश्यता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां उड़ानों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, केदारघाटी में पिछले 15 वर्षों के दौरान 13 हेली दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कुल 41 लोगों की मौत हुई है.

पिछले साल केदारघाटी में क्रैश हुआ था हेलिकॉप्टर, सात की मौत

15 जून 2025 को रुद्रप्रयाग जिले के गौरी माई खर्क के पास एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. आर्यन कंपनी का यह हेलिकॉप्टर केदारनाथ से यात्रियों को लेकर लौट रहा था। हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई थी.

इस घटना के करीब एक साल बाद अब चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में एक और हेलिकॉप्टर दुर्घटना हुई है. शुक्रवार को बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा के लिए रवाना हुआ ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर जोशीमठ घाटी के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें पायलट समेत छह लोग सवार थे और सभी की जान चली गई। यात्रियों के बेंगलुरु निवासी होने की जानकारी सामने आई है.

केदारघाटी में हुए बड़े हेलिकॉप्टर हादसों पर एक नजर

केदारनाथ और आसपास के इलाकों में पिछले कई वर्षों के दौरान कई हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं और आपात लैंडिंग की घटनाएं सामने आई हैं. इनमें कुछ हादसों में लोगों की जान गई, जबकि कई घटनाओं में यात्री सुरक्षित बच गए.

  • 12 जून 2009: केदारनाथ हेलीपैड पर हेलिकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई.
  • 21 जून 2013: जंगलचट्टी में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें पायलट की मौत हो गई.
  • 25 जून 2013: गौरीकुंड के पास एमआई-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हादसे में 21 जवानों की जान चली गई.
  • 28 जून 2013: केदारनाथ से करीब दो किलोमीटर आगे गरुड़चट्टी में हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ। इसमें तीन लोगों की मौत हुई.
  • 25 मई 2016: गुप्तकाशी में हवा में हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित रहे.
  • 3 अप्रैल 2018: केदारनाथ में एमआई-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटना हुई। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई.
  • 13 मई 2019: केदारनाथ में तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग करानी पड़ी.
  • 18 अक्टूबर 2022: केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा हेलिकॉप्टर गरुड़चट्टी के पास पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें सात लोगों की मौत हुई.
  • 23 अप्रैल 2023: केदारनाथ हेलीपैड पर हेलिकॉप्टर के टेल रोटर की चपेट में आने से UCADA के वरिष्ठ वित्त नियंत्रक की मौत हो गई.
  • 24 मई 2024: हेलीपैड से करीब 100 मीटर आगे हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ. सभी यात्री सुरक्षित बच गए.
  • 17 मई 2025: केदारनाथ धाम में हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग हुई. कोई जनहानि नहीं हुई.
  • 7 जून 2025: बड़ासू हेलीपैड से उड़ान भरते समय हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ. कोई जनहानि नहीं हुई.
  • 15 जून 2025: केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा हेलिकॉप्टर गौरी माई खर्क के पास क्रैश हो गया. हादसे में सात लोगों की मौत हुई.

पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर उड़ान बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाएं तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं. खासकर केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे दुर्गम धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए इन सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है. बादल, तेज हवाएं और कम दृश्यता उड़ान संचालन को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे में मौसम की सटीक जानकारी, तकनीकी जांच और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है. चमोली में हुए ताजा हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह और मजबूत किया जाए. हालांकि, इस दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

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