पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान आज भीषण विद्रोह की आग में सुलग रहा है। 31 जनवरी 2026 से शुरू हुए बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के खूंखार ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ ने पाकिस्तानी हुकूमत की नींव हिला दी है। यह केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि इस प्रांत के संसाधनों के शोषण के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा है। इस बढ़ते आंतरिक संकट से घबराकर पाकिस्तान एक बार फिर अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर लगातार बड़े और सुनियोजित हमले कर रहे हैं। BLA का दावा है कि इस संघर्ष में उन्होंने अब तक 280 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उन्होंने 200 से अधिक विद्रोहियों को ढेर किया है। क्वेटा से लेकर नोशकी तक, पाकिस्तानी फौज अब टैंकों और ड्रोनों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन विद्रोही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इस विद्रोह की मुख्य जड़ आर्थिक असमानता है। यह प्रांत गैस, तेल और खनिजों का बड़ा खजाना है, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चलती है, लेकिन स्थानीय बलूच आबादी को बजट का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही मिलता है।
इस आंतरिक संकट से ध्यान हटाने के लिए, पाकिस्तान के नेताओं और सेना ने एक बार फिर भारत को इस मामले में घसीटना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि भारत, BLA को समर्थन दे रहा है। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये दावे ‘बेबुनियाद’ हैं और पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे झूठे आरोप लगा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाया है।
सामरिक दृष्टिकोण से भी बलूचिस्तान भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यहां का ग्वादर बंदरगाह और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत हमेशा से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर चिंता जताता रहा है। साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लाल किले से बलूच लोगों की तकलीफों का जिक्र किया था। भारत का रुख साफ है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, लेकिन बलूच लोगों की जायज मांगों को अनसुना नहीं किया जा सकता।
वर्तमान में, बलूचिस्तान में घर जलाए जा रहे हैं और लोग लापता हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अपनी गलतियों को सुधार कर वहां शांति स्थापित कर पाएगा, या यह विद्रोह दक्षिण एशिया में एक नया और हिंसक इतिहास लिखने की ओर बढ़ रहा है।









