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बांग्लादेश: चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों पर जानलेवा हमला, यूनुस की रणनीति पर गंभीर सवाल

नाव से पहले अल्पसंख्यकों पर जानलेवा
नाव से पहले अल्पसंख्यकों पर जानलेवा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले 18 दिनों में छह हिंदुओं की निर्मम हत्या हो चुकी है, जबकि अकेले 24 घंटों में दो और लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से पता चलता है कि अल्पसंख्यक समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, और अंतरिम सरकार इस हिंसा को रोकने में पूरी तरह से विफल दिख रही है। सवाल यह है कि क्या यह हिंसा महज धार्मिक अत्याचार है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक साजिश काम कर रही है?

बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्तों से अल्पसंख्यक समुदाय लगातार निशाने पर है। यह भयावह स्थिति तब पैदा हुई है जब देश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। इस हिंसा को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि वह बांग्लादेश में सेना भेजकर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उनका स्पष्ट मानना है कि यह केवल धार्मिक उत्पीड़न नहीं है, बल्कि एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरिम सरकार चला रहे मोहम्मद यूनुस इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यूनुस कथित तौर पर चुनाव टालना चाहते हैं, और इसके लिए उन्होंने कट्टरपंथी जमात-इस्लामी समूह को खुली छूट दे दी है। यूनुस की रणनीति यह है कि हिंसा और भय का माहौल बनाकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जाए, जिससे भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव कम हो सके और अंतरिम सरकार की पकड़ बनी रहे। उनका अंतिम लक्ष्य चुनाव टालकर अपने राजनीतिक दबदबे को बनाए रखना है।

भारत की सबसे बड़ी चिंता यही है कि चुनाव समय पर हों और एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। तारिक रहमान की भारत समर्थक लोकप्रियता यूनुस के लिए खतरा बन गई है, क्योंकि वह खुलकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चुनाव समय पर होते हैं, तो यह यूनुस और कट्टरपंथी समूहों के रणनीतिक खेल को नाकाम कर सकता है।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अब दांव पर है। यूनुस के राजनीतिक दांव को नाकाम करने और 12 फरवरी के चुनावों को समय पर सुनिश्चित कराने के लिए अब भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सक्रिय भूमिका निर्णायक साबित होगी।

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