Loading...
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
24K Gold
Loading...
Silver (1kg)
Loading...
24K Gold
Loading...
ताज़ा ख़बरें
Loading updates...

बांग्लादेश में छात्र नेता की हत्या के बाद भीषण हिंसा: क्या खतरे में है लोकतंत्र?

बांग्लादेश में छात्र नेता की हत्या के बाद भीषण हिंसा

बांग्लादेश इस समय एक गंभीर राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा संकट के दौर से गुजर रहा है। राजधानी ढाका सहित कई बड़े शहरों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस उथल-पुथल की जड़ में चर्चित छात्र नेता उस्मान हादी की हालिया हत्या को माना जा रहा है, जिसने पूरे देश में आक्रोश की आग भड़का दी है। उस्मान हादी सेना और सत्ता प्रतिष्ठान के मुखर आलोचक थे और उनकी हत्या को लोकतंत्र पर सीधा हमला माना जा रहा है।

उस्मान हादी बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों का जाना-पहचाना चेहरा थे। हत्या से पहले उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि देश में लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो आंदोलन सड़कों से संसद तक पहुंचेगा और इसके लिए सरकार और सेना जिम्मेदार होंगे। इस बयान के कुछ ही समय बाद, उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद छात्रों और युवाओं में जबरदस्त गुस्सा फैल गया, और हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने सेना तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके चलते आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। ढाका समेत कई शहरों में मीडिया दफ्तरों और सरकारी इमारतों को भी निशाना बनाया गया। छात्र संगठनों का कहना है कि यह केवल एक नेता की हत्या नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र को डराने और छात्रों की आवाज़ को दबाने की सोची-समझी कोशिश है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, कुछ छात्र नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की भूमिका हो सकती है। उनका दावा है कि सेना और कुछ कट्टरपंथी गुटों के जरिए हालात को जानबूझकर बिगाड़ा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

हालात उस समय और भी बिगड़ गए, जब देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू समुदाय पर हमलों की खबरें आने लगीं। कई इलाकों में घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया गया, जिससे अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है। मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गहरी चिंता जताई है। यह पूरा संकट ऐसे वक्त में सामने आया है, जब बांग्लादेश में 2026 के आम चुनाव नजदीक हैं। विपक्ष का आरोप है कि हिंसा और अस्थिरता का माहौल बनाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।

छात्र नेता की हत्या और उसके बाद भड़के जनआक्रोश ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि देश लोकतंत्र की राह पर आगे बढ़ेगा या यह संकट और गहराता चला जाएगा।