मायानगरी मुंबई की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। ढाई दशक से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर राज कर रहे ठाकरे परिवार का किला आखिरकार ढह गया है। बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट के गठबंधन (महायुति) ने स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए मुंबई की सत्ता की चाबी अपने नाम कर ली है। यह जीत न सिर्फ एक चुनावी परिणाम है, बल्कि मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।
बीएमसी के सभी 227 वार्डों के परिणाम सामने आने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। महायुति ने 118 सीटें जीतकर बहुमत (114) के आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है।
सीटों का विस्तृत ब्यौरा:
BJP: 89 सीटें (पिछली बार 82 सीटों से बेहतर प्रदर्शन)
एकनाथ शिंदे गुट (शिवसेना): 29 सीटें
महायुति कुल: 118 सीटें
विपक्ष में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं, जो उन्हें दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनाती है, लेकिन वे सत्ता से दूर रहे। वहीं, कांग्रेस ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की। राज ठाकरे की मनसे को बड़ा झटका लगा और वह महज 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 8 सीटें जीतीं।
बीजेपी और शिंदे गुट ने इस जीत को विकास की राजनीति पर जनता के भरोसे का परिणाम बताया। महायुति की जीत के बाद, CM देवेंद्र फडणवीस ने इस परिणाम को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और विकास की राजनीति की जीत बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई की जनता ने विकास पर भरोसा जताया है और अब शहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने सीधे ठाकरे परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई ने 25 साल सत्ता में रहने वालों के खिलाफ वोट दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों ने भावनात्मक नहीं, बल्कि विकास के ब्रांड को चुना है। शिंदे ने यह भी दावा किया कि जिन 29 नगर निगमों में चुनाव हुए, उनमें से ज्यादातर में महायुति का मेयर होगा।
इस चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स राज और उद्धव ठाकरे का 20 साल बाद साथ आना भी मराठी वोटों को एकजुट नहीं कर सका। ‘ठाकरे ब्रांड और मराठी अस्मिता’ का नारा मतदाताओं पर असर डालने में विफल रहा, जबकि मुस्लिम और हिंदी भाषी वोटरों के छिटकने से इस गठबंधन को बड़ा नुकसान हुआ। बीएमसी जैसी देश की सबसे अमीर नगर पालिका पर नियंत्रण खोना, जिसका बजट 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
यह सिर्फ सत्ता का बदलाव नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीति का एक निर्णायक मोड़ है। अब सबकी निगाहें नए मेयर के नाम और स्थायी समिति के गठन पर टिकी हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीजेपी-शिंदे गठबंधन इस ऐतिहासिक जनादेश के साथ मुंबई के लिए क्या नई योजनाएं लेकर आता है।









