मुंबई निकाय चुनाव (BMC) के नतीजे आने के बाद देश की सबसे अमीर नगर निगम में सत्ता का समीकरण बदल गया है। बीजेपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने शानदार जीत दर्ज की है, लेकिन हार के बाद शिवसेना (UBT) ने भी अपनी सियासी जंग जारी रखने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। उद्धव ठाकरे गुट ने जहां हार स्वीकारने से इनकार किया है, वहीं पार्टी नेता संजय राउत ने सीधे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है।
नतीजों के तुरंत बाद शिवसेना (UBT) की तरफ से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर पोस्ट करते हुए एक बड़ा ऐलान किया। पोस्ट में साफ तौर पर लिखा गया कि, “ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यह तब तक जारी रहेगी, जब तक मराठी व्यक्ति को वह सम्मान नहीं मिल जाता, जिसका वह हकदार है।” यह बयान स्पष्ट करता है कि बीएमसी में हार के बावजूद उद्धव ठाकरे गुट का मुख्य एजेंडा अब भी मराठी अस्मिता और सम्मान की राजनीति पर केंद्रित है।
संजय राउत ने डिप्टी सीएम शिंदे पर साधा निशाना
हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। राउत ने ‘X’ पर शिंदे की तुलना ‘जयचंद’ (विश्वासघाती) से करते हुए आरोप लगाया कि अगर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के साथ विश्वासघात नहीं किया होता, तो आज मुंबई में बीजेपी का मेयर नहीं होता। राउत ने यह भी कहा कि मराठी लोग शिंदे को हमेशा गद्दार के तौर पर याद रखेंगे। गौरतलब है कि 2022 में शिंदे ने 39 विधायकों के साथ बगावत कर उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी थी, जिसका असर इस निकाय चुनाव में भी देखने को मिला है।
प्रमुख राजनीतिक दलों का प्रदर्शन
बीएमसी चुनावों में बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन ने जबरदस्त जीत दर्ज की है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:
* बीजेपी 89 सीटों पर जीत हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
* सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 29 सीटें जीतीं।
* शिवसेना (UBT) को 65 सीटों से संतोष करना पड़ा।
* कांग्रेस ने 24 सीटें हासिल कीं, जबकि मनसे को 6 सीटें मिलीं।
* AIMIM ने भी 8 सीटें जीतकर शहर की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
बीजेपी-शिंदे गुट की यह जीत शहरी क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ का संकेत देती है, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए यह नतीजे आत्ममंथन और रणनीति बदलने की चुनौती हैं।
भले ही बीएमसी की सत्ता उद्धव ठाकरे गुट के हाथ से निकल गई हो, लेकिन बालासाहेब की तस्वीर के साथ दिया गया यह संदेश साफ बताता है कि महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह मुकाबला और भी तीखा होगा।









