महाराष्ट्र की राजनीति में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनावों के बाद एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। दशकों तक मुंबई महानगर पालिका पर ठाकरे परिवार का एकछत्र दबदबा रहा था, लेकिन अब यह किला ढहता नजर आ रहा है। इन नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है, जिसे शिवसेना (UBT) के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। नतीजों के तत्काल बाद, शिवसेना UBT के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए सीधे तौर पर पार्टी के अंदरूनी ‘जयचंदों’ (गद्दारों) पर निशाना साधा है।
बीएमसी चुनावों के नतीजों के बाद मीडिया से बात करते हुए शिवसेना UBT के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बेहद तीखे आरोप लगाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर पार्टी के अंदर गद्दारी नहीं होती, तो बीजेपी की कई पीढ़ियां भी मुंबई में मेयर नहीं बना पातीं। राउत ने दावा किया कि यह हार जनादेश की नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर मौजूद ‘जयचंदों’ की वजह से हुई है।संजय राउत ने मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच सत्ताधारी गठबंधन (बीजेपी और शिंदे गुट) को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि बीएमसी सदन में भाजपा और शिंदे गुट की स्थिति बेहद नाजुक है, उनके मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन के पास केवल चार पार्षदों का मामूली बहुमत है, जबकि विपक्ष संख्या और ताकत दोनों में मजबूत स्थिति में है। राउत ने जोर देकर कहा कि महानगरपालिका के सदन में विपक्ष सबसे बड़ी ताकत के रूप में मौजूद है और किसी भी जनविरोधी फैसले को पारित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि मुंबई को न तो बड़े उद्योगपतियों के हवाले किया जाएगा और न ही ठेकेदारों का राज चलने दिया जाएगा। राउत ने चुनावी विश्लेषण करते हुए कहा कि मुकाबला पूरी तरह कांटे का रहा। उन्होंने बताया कि शिवसेना की करीब 12 से 13 सीटें ऐसी थीं, जहां पार्टी बहुत कम वोटों से हारी। उन्होंने कहा कि एमएनएस को भी 6 सीटें मिलीं और वह कई जगहों पर बेहद मामूली अंतर से हार गई, जिसका सीधा असर शिवसेना के नतीजों पर पड़ा।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते उनके पास सरकारी मशीनरी और संसाधनों की पूरी ताकत थी, बावजूद इसके चुनाव पूरी तरह बराबरी का रहा। शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने कहा कि विपक्ष के पास सदन में इतने पर्याप्त नंबर हैं कि अगर ज़रूरी हुआ तो कभी भी तख्तापलट किया जा सकता है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी हर राज्य में पार्टियां तोड़कर और अंदरूनी गद्दारी को बढ़ावा देकर ही सत्ता हासिल करती है।
बीएमसी चुनावों के इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुराने सत्ता समीकरण बदल चुके हैं, लेकिन सदन के अंदर की राजनीति अब बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां मेयर का चुनाव और सदन की कार्यवाही हर कदम पर टकराव की संभावना पैदा करेगी।









