आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन उठाना भी जोखिम भरा हो गया है। हाल के वर्षों में साइबर अपराधियों ने ‘कॉल स्पूफिंग’ नामक एक खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों की गाढ़ी कमाई लूटी है। यह तकनीक इतनी सटीक है कि आपके फोन की स्क्रीन पर बैंक, पुलिस या सीबीआई का असली नंबर दिखता है, जबकि कॉल करने वाला विदेश में बैठा कोई शातिर ठग होता है। यह जानना बेहद जरूरी है कि यह घोटाला कैसे काम करता है और इससे बचाव के क्या तरीके हैं।
कॉल स्पूफिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें ठग VoIP (इंटरनेट के जरिए कॉलिंग) ऐप्स या विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करके आपके फोन की स्क्रीन पर दिखने वाले कॉलर आईडी को बदल देते हैं। वे किसी बैंक, पुलिस स्टेशन, सीबीआई या आरबीआई के आधिकारिक नंबर को स्पूफ (नकल) कर देते हैं, जिससे आप भ्रमित हो जाते हैं कि कॉल सचमुच उसी संस्थान से आ रही है।
भारत में कॉल स्पूफिंग का सबसे खतरनाक इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) घोटाले में हो रहा है। ठग खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताते हैं, और पीड़ित को वीडियो कॉल पर रखते हुए धमकाते हैं कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में आया है और उन्हें ‘डिजिटल रूप से गिरफ्तार’ किया जा रहा है। घबराए हुए लोग दबाव में आकर लाखों-करोड़ों रुपये तुरंत ट्रांसफर कर देते हैं। हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक भारत में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों ने 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवाए हैं, जिसमें स्पूफिंग का बड़ा हाथ रहा है।
ये अपराधी विदेशी सर्वर, अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज और उन्नत AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। ये मनोवैज्ञानिक दबाव—जैसे डर, लालच, या भावनात्मक ब्लैकमेल—का उपयोग करके पीड़ित को सोचने का मौका नहीं देते। हालांकि, सरकार ने CIOR सिस्टम जैसी पहल से अंतरराष्ट्रीय स्पूफ्ड कॉल्स को 97% तक कम किया है, लेकिन ठग अब लोकल नंबर स्पूफ करके नए रास्ते तलाश रहे हैं।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
किसी भी अनजान या संदिग्ध कॉल पर OTP, CVV, पासवर्ड या अन्य कोई व्यक्तिगत जानकारी कभी साझा न करें।
अगर कोई अधिकारी बनकर धमकी दे तो तुरंत कॉल काटें और खुद संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से संपर्क करके सत्यापन करें।
संदिग्ध कॉल आने पर, उसी व्यक्ति को उसके ज्ञात मोबाइल नंबर पर वापस कॉल करके पुष्टि करें।
अपने फोन में Truecaller या सरकार द्वारा समर्थित ‘चेक कॉलर’ जैसे सत्यापन ऐप्स का उपयोग करें।
याद रखें, बैंक या सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन पर आपसे सीधे पैसे की मांग नहीं करती हैं।
संदेह होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार आपका डर है। थोड़ी सी सतर्कता और जानकारी आपको न सिर्फ अपनी, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। सावधान रहें, सुरक्षित रहें, क्योंकि एक कॉल आपकी पूरी जमा-पूंजी छीन सकती है।









