केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा दिए गए इस्तीफे के बीच विपक्षी दलों ने अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने का जरिया बना लिया है। जहां एक तरफ सरकार ने करोड़ो छात्रों के भविष्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए यह संवेदनशील कदम उठाया, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे अपनी ‘जीत’ बताकर घटिया बयानबाजी पर उतर आए हैं। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से श्रेय लेने की होड़ में लग गया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आक्रामक बयानबाजी शुरू कर दी। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इसे सरकार का अहंकार टूटना करार दिया। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम, शशि थरूर, राजीव शुक्ला और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले जैसे दिग्गजों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे विपक्षी की जीत बताई। हालांकि, इन बयानों से साफ जाहिर होता है कि विपक्ष को छात्रों की पढ़ाई या निष्पक्ष व्यवस्था की चिंता कम, बल्कि सरकार के नैतिक कदमों को भुला दिया है।
जब NEET -UG परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, तब केंद्र सरकार ने बिना एक पल की देरी किए कड़े कदम उठाए थे। सरकार ने तुरंत पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) जैसी निष्पक्ष एजेंसी को सौंपी, परीक्षा रद्द करके दोबारा आयोजित कराई और भविष्य के लिए कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) का ऐतिहासिक फैसला लिया।
सरकार के इन पारदर्शी कदमों की सराहना करने के बजाय विपक्ष लगातार छात्रों को गुमराह करने और भड़काने की रणनीति पर काम करता रहा। अब जब शिक्षा मंत्री ने किसी भी प्रकार की राजनीति से ऊपर उठकर युवाओं की शांति और शिक्षा व्यवस्था की शुचिता के लिए अपना पद छोड़ा है, तब भी विपक्षी नेता इस पर रचनात्मक चर्चा करने के बजाय संसद और सड़कों पर माहौल खराब करने की फिराक में हैं।
छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहा है विपक्ष
राजीव शुक्ला, सुप्रिया सुले और शशि थरूर जैसे नेता बड़े-बड़े दावे तो कर रहे हैं, लेकिन अपनी राज्य सरकारों के कार्यकाल में परीक्षा लीक और शिक्षा घोटालों के रिकॉर्ड को भूल जाते हैं। आज जब ये विपक्ष में है तब यह पेपर लीक का मुद्दा ढाल बना कर यह छात्रों को भ्रमित करके राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है। बल्कि योगी सरकार का कहना ये है की सरकार केवल चार ही जाति में विश्वास रखती है – गरीब, युवा, किसान और नारी और हमेशा से इनके कल्याण के लिए तत्पर रहती है, जबकि विपक्ष के लिए यह सिर्फ एक राजनैतिक मुद्दा बनकर रह गया है जिसे वे आने वाले चुनावों में इस्तेमाल कर सके।