भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते अब इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुँच चुके हैं। पिछले साल हुए आतंकी हमलों के बाद भारत ने आतंकवाद को सबक सिखाने के लिए जो सख्त फैसले लिए हैं, उनमें 1960 की सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर उठाया गया कठोर कदम सबसे निर्णायक साबित हो रहा है। भारत के इस कड़े रुख ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है, और अब पाकिस्तान इस महत्वपूर्ण संधि पर स्पष्टीकरण के लिए भारत के सामने गुहार लगा रहा है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने हाल ही में पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने 11 फरवरी को भारतीय सिंधु जल कमिश्नर को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस चिट्ठी के जरिए पाकिस्तान ने चेनाब नदी पर बन रहे स्वालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी और सलाह मांगी है। पाकिस्तान का तर्क है कि 1960 के समझौते के तहत भारत को यह जानकारी देना अनिवार्य है। हालांकि, भारत ने पिछले साल यह स्पष्ट कर दिया था कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’, जिससे यह संदेश गया कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पाकिस्तान को क्यों सता रहा है स्वालकोट प्रोजेक्ट का डर?
स्वालकोट प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चेनाब नदी पर बन रहा है। यह 1,856 मेगावाट का एक विशाल ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट है, जिसका रणनीतिक महत्व भारत के लिए बहुत अधिक है। 1984 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त तेजी दिखाई है। पाकिस्तान का मुख्य डर यह है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत चेनाब के पानी के बहाव पर नियंत्रण हासिल कर लेगा, जो उसकी कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। भारत के सख्त तेवरों ने यह संदेश दे दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पर लगाम नहीं लगती, तब तक पानी को लेकर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
कूटनीति से लेकर खेल के मैदान तक घिरी घेराबंदी
यह तनाव सिर्फ जल संधि तक सीमित नहीं है। प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत के सख्त रुख पर अपनी खीझ व्यक्त की। भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने से इनकार करने को उन्होंने ‘अफसोसजनक’ बताया। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा हाल ही में अपने आधिकारिक नक्शों से PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) को भारत का हिस्सा दिखाने की घटना ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की बेचैनी को उजागर किया है।
पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी तरीकों और बातचीत की दुहाई दे रहा है, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट है—आतंकवाद को कड़ा सबक सिखाने का वक्त अब पानी की धाराओं के साथ शुरू हो चुका है, और किसी भी मुद्दे पर ढील नहीं दी जाएगी।









