संसद में चल रहा गतिरोध अब राजनीतिक पत्र युद्ध में बदल गया है। विपक्षी महिला सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपाती होने और निलंबन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर करने के बाद, अब सत्ताधारी भाजपा की महिला सांसदों ने भी मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को भाजपा की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को एक जवाबी पत्र लिखा, जिसमें विपक्षी सांसदों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने का गंभीर आरोप लगाया गया है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
यह पूरा मामला 4 फरवरी की घटना से जुड़ा है, जब प्रधानमंत्री का संबोधन होना था लेकिन विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया था। इस दौरान कांग्रेस सहित अन्य दलों की करीब 8 से 10 महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंच गईं और कार्यवाही बाधित हुई, जिसके बाद सदन को स्थगित कर दिया गया था। इस घटना के बाद विपक्षी महिला सांसदों ने सोमवार को स्पीकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सत्ताधारी दल के दबाव में स्पीकर विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस सांसदों के खिलाफ बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष रहने और सभी सांसदों की गरिमा की सुरक्षा करने की अपील की थी।
भाजपा महिला सांसदों के पत्र में मुख्य बातें:
भाजपा की महिला सांसदों ने अपने पत्र में 4 फरवरी के घटनाक्रम को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक’ बताया। उन्होंने स्पीकर की कार्यवाही बनाए रखने के तरीके की प्रशंसा करते हुए कहा:
सदन की गरिमा पर हमला: सांसदों ने लिखा कि विपक्षी सांसदों ने न केवल सदन के वेल में प्रवेश किया, बल्कि स्पीकर की मेज पर चढ़कर कागज भी स्पीकर की ओर उछाले, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची।
आक्रामक व्यवहार: पत्र में विपक्षी महिला सदस्यों के आक्रामक व्यवहार का उल्लेख किया गया। उन्होंने लिखा कि विपक्षी महिला सदस्यों ने न सिर्फ प्रधानमंत्री की सीट को घेरा, बल्कि अपनी सीट छोड़कर सत्ता पक्ष की ओर भी चली गईं।
सख्त कार्रवाई की मांग: भाजपा सांसदों ने अपील की कि सदन के भीतर ऐसे घिनौने कृत्य करने वाले और हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों को कलंकित करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि 5 फरवरी को स्पीकर ओम बिरला ने खुद कहा था कि 4 फरवरी को लोकसभा में जिस तरह का माहौल था, उसमें कोई भी अप्रिय और अप्रत्याशित घटना घट सकती थी। उन्होंने विपक्षी सांसदों के इस व्यवहार को संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताया था।
सदन में चल रही यह तनातनी अब दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव में बदल गई है, जहां महिला सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब यह देखना होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इन दोनों पत्रों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को ‘बदनाम’ करने के आरोपों पर क्या निर्णायक कार्रवाई करते हैं।









