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माघ मेला 2026 विवाद: शंकराचार्य और प्रशासन में गहराया टकराव, पालकी पर नोटिस और कानूनी दांव-पेच की तैयारी

शंकराचार्य और प्रशासन में बढ़ा टकराव

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने वाले माघ मेला 2026 की तैयारियों के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्राधिकरण के बीच है। मौनी अमावस्या के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में पालकी लेकर जाने के प्रयास के बाद प्रशासन ने जहां उन्हें नोटिस जारी किया, वहीं शंकराचार्य पक्ष ने अब जवाबी नोटिस भेजकर कानूनी लड़ाई के संकेत दे दिए हैं। यह टकराव तेजी से गहराता जा रहा है।

माघ मेले में यह पूरा विवाद मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दौरान शुरू हुआ। भारी भीड़ को देखते हुए, मेला प्रशासन ने संगम नोज इलाके को बेहद संवेदनशील घोषित किया था और साफ निर्देश दिए थे कि इस क्षेत्र में किसी भी वाहन, पालकी या बग्घी को जाने की अनुमति नहीं होगी। सभी श्रद्धालुओं को पैदल ही जाना था।

प्रशासन ने क्यों जारी किया नोटिस?

मेला प्राधिकरण के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या के दिन पालकी से संगम नोज तक जाने की जिद पर अड़ गए। पुलिस और प्रशासन के समझाने के बावजूद करीब तीन घंटे तक खींचतान चलती रही। इस दौरान उनके समर्थकों ने पांटून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर को तोड़ने की भी कोशिश की।

नियम उल्लंघन का आरोप: नोटिस में कहा गया है कि लाखों श्रद्धालुओं के स्नान करते समय पालकी या बग्घी ले जाना भगदड़ का कारण बन सकता था, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। इस कदम से मेला व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई।

शीर्षक पर विवाद: प्रशासन ने नोटिस में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसमें कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुद को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड और होर्डिंग लगवा रहे हैं, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोक लगी हुई है, जो अदालत की अवमानना है।

मेला प्राधिकरण की सख्त चेतावनी:

मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब देने की चेतावनी दी है। ऐसा न करने पर उन्हें माघ मेले में आवंटित की गई सरकारी जमीन और अन्य सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं, साथ ही भविष्य में उनके प्रवेश पर स्थायी रोक भी लगाई जा सकती है। यह नोटिस सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

शंकराचार्य पक्ष का जवाबी हमला

इस नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से उनके वकील के जरिए प्रशासन को पलटवार भेजा गया है। उन्होंने नोटिस को पूरी तरह से गलत बताते हुए 24 घंटे के भीतर उसे वापस लेने की मांग की है। उनके वकील ने तर्क दिया है कि उनका पट्टाभिषेक (राज्याभिषेक) पहले ही हो चुका था और प्रशासन जिन आदेशों का हवाला दे रहा है, वे बाद के हैं। शंकराचार्य पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो वे कोर्ट में अवमानना याचिका समेत अन्य कानूनी कदम उठाएंगे।

फिलहाल, प्रयागराज में यह धार्मिक और प्रशासनिक विवाद नोटिस-पलटवार के बाद कानूनी लड़ाई की दहलीज पर आ पहुंचा है। सभी की नजरें अब प्रशासन और शंकराचार्य पक्ष के अगले कानूनी कदम पर टिकी हुई हैं।

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