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महाराष्ट्र निकाय चुनाव: अजित पवार की NCP को बड़ा झटका, आत्ममंथन के बीच ‘पावर, परिवार और पवार’ पर सवाल

हार के बाद पावर, परिवार और पवार पर उठे सवाल
हार के बाद पावर, परिवार और पवार पर उठे सवाल

महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। एक तरफ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना (महायुति) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, वहीं उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को करारा झटका लगा है। खास तौर पर पिंपरी-चिंचवड़ जैसे गढ़ में मिली हार ने अजित पवार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है, जिससे अब ‘पावर, परिवार और पवार’ की तिकड़ी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इन चुनावों में महायुति (बीजेपी और शिवसेना-शिंदे गुट) को बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के नतीजों में बड़ी सफलता मिली। इसके विपरीत, एनसीपी के लिए यह परिणाम उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत रहे। एनसीपी का गढ़ माने जाने वाले पिंपरी-चिंचवड़ में मिली हार अजित पवार के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है। हार के बाद पार्टी आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है।

चुनावी नतीजों के बाद शरद पवार और अजित पवार की मुलाकात ने एक बार फिर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज कर दी थीं। हालांकि, अजित पवार ने इन चर्चाओं पर खुलकर विराम लगाया।

अजित पवार ने बयान देते हुए स्पष्ट किया कि, “दोनों एनसीपी गुटों के एक साथ आने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। शरद पवार से मुलाकात एक कार्यक्रम से जुड़ी थी, उसे राजनीति से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।”

हालांकि, इन राजनीतिक उठापटक के बीच बारामती में एक कृषि प्रदर्शनी में पूरा पवार परिवार एक साथ नजर आया। उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले के बीच हुई विशेष चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में परिवार के भीतर संवाद और भविष्य की संभावनाओं के संकेत दिए।

हार को स्वीकार करते हुए, अजित पवार ने बीजेपी की जीत के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि, “लोकतंत्र में मतदाता राजा होता है और बीजेपी को मिली सफलता के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं।”

स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने बताया कि निर्णय स्थानीय स्तर पर लिए जाते हैं और राजनीति में निर्णय जमीनी हालात देखकर लिए जाते हैं। ईवीएम पर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि, “अक्सर हार के बाद ऐसे सवाल उठते हैं। 29 जगहों पर चुनाव हुए, हजारों उम्मीदवार मैदान में थे, ये लोकतंत्र है।”

संगठन की मजबूती पर ज़ोर देते हुए अजित पवार ने कहा कि, “हार से घबराना नहीं चाहिए। हम बैठेंगे, समीक्षा करेंगे, और संगठन को मज़बूत करेंगे।”

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की सियासत में महायुति जीत के शिखर पर है, जबकि अजित पवार की एनसीपी आत्ममंथन कर रही है, जहां सत्ता, संघर्ष और पवार परिवार तीनों एक साथ चल रहे हैं।

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