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मोदी सरकार को बड़ी राहत! संविधान संशोधन बिल पर शरद पवार की NCP का समर्थन, सुप्रिया सुले ने रखी बड़ी शर्त

सुप्रिया सुले

शरद पवार की NCP ने संसद में संविधान संशोधन बिल का सशर्त समर्थन दिया, 50% सीट बढ़ोतरी को शर्त बनाया।

मुंबई: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार को एक बड़ी राजनीतिक राहत मिलती दिख रही है. शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) ने संकेत दिया है कि वह लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करेगी. हालांकि पार्टी ने इसके लिए एक अहम शर्त भी रखी है.

संविधान संशोधन बिल को NCP का सशर्त समर्थन

मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि सरकार संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान करती है, तो उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी. सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी का रुख स्पष्ट है और यदि प्रस्ताव इसी स्वरूप में संसद में लाया जाता है तो एनसीपी उसके पक्ष में मतदान करेगी.

सर्वदलीय बैठक में हुई थी चर्चा

सुप्रिया सुले ने बताया कि इस प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई सर्वदलीय बैठक में चर्चा हुई थी. उनके मुताबिक इस दौरान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और डीएमके ने भी इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया था. उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र में यदि सरकार यह विधेयक पेश करती है तो उनकी पार्टी 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन करेगी.

मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित है. माना जा रहा है कि इसी दौरान सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है. यदि ऐसा होता है तो यह संसद के सबसे महत्वपूर्ण विधायी एजेंडों में शामिल होगा.

मोदी सरकार के लिए क्यों अहम है यह समर्थन?

शरद पवार की पार्टी के समर्थन से संसद में सरकार की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है. एनसीपी (एसपी) के पास लोकसभा में 8 सांसद हैं, जबकि शरद पवार राज्यसभा के सदस्य हैं. ऐसे में संविधान संशोधन जैसे विशेष बहुमत वाले विधेयक पर यह समर्थन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अन्य सहयोगी दलों का भी समर्थन मिलता है, तो सरकार के लिए आवश्यक संख्या जुटाना पहले की तुलना में आसान हो सकता है.

पिछली बार क्यों नहीं बढ़ पाया था मामला?

पिछले संसदीय सत्र में विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण इस तरह के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी थी. लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एनसीपी (एसपी) के सकारात्मक रुख ने नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं. हालांकि अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी जब सरकार विधेयक का अंतिम मसौदा संसद में पेश करेगी और उस पर विभिन्न दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आएगी.

अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर

सुप्रिया सुले के बयान के बाद अब राजनीतिक नजरें केंद्र सरकार पर टिकी हैं. यदि सरकार विधेयक में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि का प्रावधान शामिल करती है, तो उसे विपक्ष के एक महत्वपूर्ण दल का समर्थन मिल सकता है. ऐसे में आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक बहस और रणनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं.

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