शरद पवार और देवेंद्र फडणवीस की देर रात की बैठक से महाराष्ट्र में NDA में शामिल होने की अटकलें तेज हुईं।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक फ़ेरबदल सामने आया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार गुट (NCP-SP) के नेताओं के बीच देर रात हुई अलग-अलग बैठकों ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है. इन बैठकों के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या शरद पवार का गुट विपक्ष छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहा है या फिर यह केवल राजनीतिक संवाद का हिस्सा है. किसी भी पक्ष ने इन बैठकों के एजेंडे पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे महाराष्ट्र की बदलती राजनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
देर रात हुई बैठकों ने बढ़ाईं राजनीतिक अटकलें
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने सबसे पहले मुंबई स्थित सिल्वर ओक में शरद पवार से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की. इसी दौरान सत्ता में शामिल एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी मुख्यमंत्री से अलग से मुलाकात की. इन लगातार हुई बैठकों ने यह अटकलें तेज कर दी हैं कि राज्य में किसी नए राजनीतिक समीकरण की तैयारी चल रही है.
क्या एनसीपी (SP) के विधायक NDA के पक्ष में हैं?
अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि एनसीपी (एसपी) के कई विधायक लंबे समय तक विपक्ष में रहने से असहज हैं. उनका मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण विकास कार्यों के लिए फंड और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में कठिनाई हो रही है. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर एक वर्ग सत्ता के साथ जाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है. हालांकि अंतिम फैसला अब भी शरद पवार के हाथ में माना जा रहा है और उन्होंने अभी तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.
ऑपरेशन टाइगर के बीच क्यों बढ़ीं चर्चाएं?
महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं. पहले कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलें सामने आईं, फिर एनडीए में शामिल होने की खबरों ने जोर पकड़ा. अब देर रात हुई बैठकों ने इन चर्चाओं को और अधिक हवा दे दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शरद पवार कोई बड़ा फैसला लेते हैं तो इसका असर राज्य की राजनीति पर दूरगामी हो सकता है.
NDA के लिए क्यों अहम है NCP (SP)?
भले ही एनसीपी (एसपी) के पास विधानसभा में सीमित संख्या में विधायक और लोकसभा में कुछ सांसद हैं, लेकिन संसद में संख्या संतुलन और भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों, खासकर परिसीमन (Delimitation) जैसे मुद्दों को देखते हुए छोटे दलों का समर्थन केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा.
सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर भी उठे सवाल
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ एनसीपी भी अंदरूनी चुनौतियों का सामना कर रही है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के चयन को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है. पूर्व राष्ट्रीय महासचिव सच्चिदानंद सिंह ने संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है. हालांकि महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कानूनी स्तर पर उचित जवाब दिया जाएगा.
अंतिम फैसला शरद पवार के हाथ में
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाएं तेज हैं, लेकिन किसी भी संभावित गठबंधन पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम निर्णय शरद पवार ही लेंगे. यदि आने वाले दिनों में एनसीपी (एसपी) किसी नए राजनीतिक गठबंधन की ओर बढ़ती है, तो इससे महाराष्ट्र की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है. फिलहाल सभी की नजरें शरद पवार के अगले कदम और दोनों पक्षों की अगली बैठकों पर टिकी हुई हैं.

