संसदीय सत्र में लगातार चल रहे हंगामे के कारण देश की सबसे बड़ी पंचायत का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बजट सत्र में सरकार और विपक्ष एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस गतिरोध के बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी है, वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए लोकतंत्र को बचाने की अपील की है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में कामकाज में रुकावट को लेकर विपक्ष, खासकर एक प्रमुख नेता (राहुल गांधी) पर निशाना साधा है। रिजिजू ने साफ शब्दों में कहा है कि संसद किसी ‘एक नेता की शर्तों पर’ नहीं चल सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी एक नेता को बोलने का अवसर मिलता है, तो बाकी पार्टियों के नेताओं को भी उतना ही समय और मौका मिलना चाहिए।
रिजिजू ने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि सिर्फ एक नेता बोले और उसके बाद सदन में हंगामा हो जाए, जिससे बाकी सांसद अपनी बात न रख पाएं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, चाहे वह बजट हो या कोई अन्य मुद्दा। हालांकि, रिजिजू ने चेतावनी दी कि अगर चर्चा नहीं हुई तो इसका नुकसान विपक्ष को ही होगा, क्योंकि सरकार के पास बहुमत है और वह अपने जरूरी काम पूरे करवा लेगी।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर संसद को नहीं चलने दे रही है। इकरा हसन ने दावा किया कि सभी सांसद बजट समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन बार-बार सदन को स्थगित कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने से क्यों रोका जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है। उनके मुताबिक, सरकार चारों तरफ से दबाव में है और इसलिए खुली चर्चा से बचना चाहती है।
स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर रिजिजू ने कहा कि इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि विपक्ष के पास जरूरी संख्या नहीं है। वहीं, सांसद इकरा हसन ने स्पीकर से अपील की है कि उन्हें सदन के रक्षक के तौर पर सभी सांसदों को बोलने का बराबर मौका देना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए सवाल पूछना और बहस करना बेहद जरूरी है।
संसद में जारी यह विवाद अब सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। फिलहाल, इस राजनीतिक गतिरोध का सीधा नुकसान देश की जनता को हो रहा है, क्योंकि उनके अहम मुद्दों पर बहस और चर्चा रुक गई है।









