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पीएम उदय योजना: कच्ची कॉलोनियों में घर का मालिकाना हक लेना होगा आसान, फीस घटाने पर विचार

PM UDAY Scheme

दिल्ली की PM UDAY योजना के तहत कच्ची कॉलोनियों में घर का मालिकाना हक लेना जल्द आसान हो सकता है, क्योंकि सरकार रेगुलराइजेशन फीस घटाने पर विचार कर रही है।

दिल्ली की अनधिकृत (कच्ची) कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों को अपने घर का मालिकाना हक दिलाने के लिए केंद्र सरकार की पीएम उदय योजना को और आसान बनाने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत लोगों की कम भागीदारी को देखते हुए अब रेगुलराइजेशन शुल्क घटाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

दिल्ली में करीब 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 45 लाख से अधिक लोगों के पास अब भी अपने घर का कानूनी स्वामित्व नहीं है। इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2019 में पीएम उदय योजना शुरू की गई थी। बाद में प्रक्रिया को सरल बनाते हुए अप्रैल 2026 में इसमें बदलाव किए गए और इसकी जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की जगह नगर निगम (MCD) को सौंप दी गई।

हालांकि प्रक्रिया आसान होने के बावजूद योजना को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अब तक 50 से भी कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह रेगुलराइजेशन के लिए तय की गई अधिक फीस है।

इसी को देखते हुए एमसीडी ने अप्रैल में डीडीए को पत्र लिखकर शुल्क कम करने की मांग की थी। अधिकारियों के अनुसार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि यदि फीस में कमी की जाती है तो बड़ी संख्या में लोग मालिकाना हक के लिए आवेदन करेंगे।

पीएम उदय योजना का उद्देश्य अनधिकृत कॉलोनियों में लोगों को उनके मौजूदा मकानों का कानूनी स्वामित्व देना है। लेकिन पहले नियम जटिल होने और अतिरिक्त निर्माण जैसी तकनीकी बाधाओं के कारण छह वर्षों में केवल करीब 40 हजार लोगों को ही इसका लाभ मिल सका।

सरकार ने नई व्यवस्था में आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है, हालांकि अदालतों में लंबित मामलों के कारण करीब 200 कॉलोनियों को फिलहाल योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

यदि रेगुलराइजेशन शुल्क कम किया जाता है, तो इससे लाखों परिवारों के लिए अपने घर का कानूनी मालिकाना हक हासिल करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान हो सकता है।

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